0 रामकुंड गणपति पंडाल में तीन पहर तक श्रोताओं को बांधे रहे कवि
कोंच-उरई। गणपति महोत्सव हालांकि अब अवसान की ओर अग्रसर है लेकिन गणपति पंडालों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम मची है। यहां रामकुंड पर विराजमान गणपति बप्पा के सानिध्य में बीती रात आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में दूरदराज से आये नामचीन कवियों और साहित्यकारों ने अपने गीतों और गजलों से ऐसा शमां बांधा कि हजारों की संख्या में मौजूद श्रोता तीन पहर तक सांसें रोके उनकी प्रस्तुतियां सुनते रहे।
भगवान गजानन की अध्यक्षता, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि देवेन्द्र निरंजन विरगुवां के मुख्य आतिथ्य और कविश्रेष्ठ सतीश मधुप मैनपुरी के सफल संचालन में आयोजित कवि सम्मेलन में वाणी वंदना के बाद काव्य पाठ का सिलसिला शुरू हुआ और बाहर से आये कवियों ने अपनी अनूदित रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। बतौर विशिष्ट अतिथि मूलचंद्र निरंजन, डॉ. दिनेश उदैनिया, प्रदीप गुप्ता, विकास पटेल, कृष्णकांत वाजपेयी, किशोर यादव, अनिल वैद, शिव प्रसाद निरंजन, डॉ. प्रदीप गर्ग, संतोष तिवारी, दिनेश मानव आदि मौजूद रहे। ब्रजेन्द्र चकोर धौलपुर राजस्थान ने रचना पाठ करते हुये व्यंग्य बांचा, चीर खींचने को यदि दुस्शासन आ गया तो आधुनिक नारी देख मन पछतायेगा..। संचालन कर रहे मधुप ने सर्वधर्म समभाव का उम्दा दर्शन दिया, इबादत भी यहीं करनी यहीं चादर चढानी है, यहीं अरदास देनी है यहीं घंटी बजानी है..। रवीन्द्र शर्मा जालौन ने रचना पाठ किया, आप जल की तरह से जब तरल हो जायेंगे, क्या कहूं कैसे कहूं खुद गजल हो जायेंगे..। कवियित्री नीलम कश्यप जालौन ने गजल प्रस्तुत करते हुये कहा, प्यार के रंग में जब संवर जायेंगे, लोग कुछ भी कहें हम निखर जायेंगे..। अजय अंजाम औरैया ने देशभक्ति की रचना पढी, जलवा जो विश्व में है मेरे देश का कायम, जलवा ये शहीदों की शहादत से बना है..। ओमप्रकाश शुक्ल अज्ञात कन्नौज ने व्यंग्य बांचा, कठिनाई से जल मिला आसानी से खून, नून बेचता मिल गया गलियों में कानून..। मीरा तिवारी प्रतापगढ ने रचनापाठ किया, बड़ा बनना है तो अपना बड़ा किरदार कर लेना, गमों में गैर के खुद को भी हकदार कर लेना..। झांसी से आये अर्जुन सिंह चांद ने भी हकीकत से मेल खाती रचना प्रस्तुत करते हुये कहा, झूठों का सम्मान बढाया जाता है, सच्चाई का मान घटाया जाता है..। गणपति पंडाल के कार्यकर्ताओं सुनीलकांत तिवारी, निर्भय यादव, विक्रांत पटेल, पिंकू निरंजन, संजीव गुर्जर, अरविंद निरंजन, नातीराजा धनौरा, संजू तिवारी, आनंद पांडे, अंशुल मिश्रा, पुष्पेन्द्र फुलैला, नन्हेंराजा, इंद्रपाल सिंह, रामस्वरूप राजपूत आदि ने कवियों और अतिथियों का स्वागत किया।






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