उरई। पूर्व सांसद बृजलाल खाबरी की आमद के बाद जालौन जिले की कांग्रेस की राजनीति में संभावित नये समीकरणों को लेकर अटकलबाजियां तेज हैं। हालांकि खाबरी ने स्वयं विधानसभा चुनाव लड़ने की संभावना से इंकार किया है लेकिन उरई क्षेत्र में उनके द्वारा अपने साले श्रीपाल के नाम की पैरवी की जा सकती है। जिसकी वजह से श्याम सुंदर चैधरी, पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष विजय चैधरी, संतराम नीलांचल आदि दावेदार परेशान हैं।
बहुजन समाज पार्टी में बृजलाल खाबरी की हैसियत पूरे बंुदेलखंड में प्रत्याशी तय करने वाली अथाॅरिटी के बतौर रही है। कांग्रेस में वे इसी तरह के रुतबे के तलबगार होगे। खाबरी चाहेगे कि उन्हें पूरे बुंदेलखंड में प्रत्याशी चयन के अधिकार न दिये जाये ंतो कम से कम बुंदेलखंड की सभी सुरक्षित सीटों पर प्रत्याशी बनाने का जिम्मा तो उन्हें सौंपा ही जाये और कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व कमोवेश इसके लिए सहमत भी है। कांग्रेस पार्टी में अपनी स्थिति और मजबूत करने के लिए धूराम चैधरी की तरह खाबरी बसपा के कुछ और कददावर क्षेत्रीय नेताओं को कुछ ही दिनों में अपनी नई पार्टी में शामिल करा सकते हैं। बृजलाल खाबरी की इस तोड़फोड़ को कामयाब न होने देने के लिए मायावती की ओर से बसपा के बुंदेलखंड के नेताओं के लिए अलर्ट जारी कर दिया गया है। बृजलाल खाबरी के इरादे नाकाम करने की चुनौती सबसे ज्यादा तिलक चंद्र अहिरवार के लिए समझी जा रही है। इसलिए तिलक चंद्र झांसी मंडल में पार्टी के नये-पुराने नेताओं की निगरानी में जुट गये हैं।
दूसरी ओर खाबरी से त्रस्त नेताओं की भी लंबी फेहरिस्त बसपा में है जो उनकी वजह से राजनीति से किनारा कर चुके थे। ऐसे लोग उनके बसपा से जाते ही फिर सक्रिय हो उठे हैं। बसपा की मीटिंगों में इसकी वजह से आने वाले दिनों में कई ऐसे चेहरे देखने को मिल सकते हैं जिन्हें लोग भूल चुके थे।
बृजलाल खाबरी की आमद को लेकर एक और सवाल सियासी हलकों में शिददत से पूंछा जा रहा है कि उनके कांग्रेस में शामिल होने की जानकारी विनोद चतुर्वेदी को थी या नही। ऐसे लोगों का कहना है कि विनोद चतुर्वेदी का असर खाबरी के आने से जालौन जिले मे कमजोर होगा जबकि कांग्रेस के अंतःपुर तक की जानकारी रखने का दावा करने वाले कह रहे है कि विनोद चतुर्वेदी खाबरी को पार्टी में शामिल किये जाने की घोषणा के समय भले ही अदृश्य रहे हो लेकिन खाबरी का कांग्रेस के लिए मन बनाने में उन्हीं की भूमिका सबसे अहम है। जिसके कारण खाबरी के साथ जुगलबंदी करके वे जिले की राजनीति को और ज्यादा इकतरफा तौर पर हांकेगे।







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