तीन युद्धों के वीर योद्धा गनर रामसनेही राठौर का निधन, गांव ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई


माधौगढ़ (जालौन)। ग्राम छौना मानपुरा आज उस शख्सियत को खोकर शोक में डूब गया, जिसने अपनी पूरी जवानी देश की सेवा में समर्पित कर दी थी। भारतीय सेना के आर्टिलरी रेजीमेंट के जांबाज सैनिक गनर रामसनेही राठौर का 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

गनर रामसनेही राठौर ने वर्ष 1962, 1965 और 1971 के युद्धों में सक्रिय भूमिका निभाई थी। देश की रक्षा के लिए उन्होंने दुश्मनों के खिलाफ तोपों से गोले बरसाए और मातृभूमि की सुरक्षा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। सेना से वर्ष 1977 में सेवानिवृत्त होने के बाद भी वे समाज सेवा से जुड़े रहे और अपनी ईमानदारी व कर्तव्यनिष्ठा के चलते ग्राम प्रधान का दायित्व भी निभाया।

उनके निधन की खबर जैसे ही गांव में फैली, शोक की लहर दौड़ गई। हर आंख नम थी और हर जुबान पर उनके साहस और सरल स्वभाव की चर्चा थी।

पूर्व सैनिक वेलफेयर एसोसिएशन की टीम ने गांव पहुंचकर पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी। राष्ट्रध्वज में लिपटे उनके पार्थिव शरीर को जब अंतिम सलामी दी गई, तो माहौल गमगीन हो उठा।

इस अवसर पर एसोसिएशन के प्रदेश संयोजक कैप्टन अखिलेश नगायच, नायब सूबेदार अनिल कुमार राठौर, सूबेदार मेजर बाबू सिंह सेगर, नायक रामनरेश सिंह राजावत, हवलदार उपेंद्र निषाद, सिपाही विकास सिंह सहित बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, जनप्रतिनिधि, महिलाएं और ग्रामीण मौजूद रहे।

गनर रामसनेही राठौर का जीवन देशभक्ति, अनुशासन और सेवा का प्रतीक रहा। उनका जाना न केवल परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

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