बलिया को मिला अंतरराष्ट्रीय पहचान, सुरहा ताल बना देश का 100 वां रामसर स्थल, पर्यटन का होगा विकास, बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

       – डाॅ० गणेश पाठक

        सदस्य, जिला गंगा         समिति, बलिया 

      5 जून को पर्यावरण दिवस के अवसर पर बलिया ज़िला को उस समय एक अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली, जब अपने देश के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट कर बताया कि ‘सुरहा ताल’ को अपने देश का 100 वां एवं उत्तर – प्रदेश का 13 वां ‘रामसर साईट’ घोषित किया गया है। यह न केवल बलिया ज़िला के लिए , बल्कि उत्तर – प्रदेश एवं देश के लिए भी गौरव की बात है। उल्लेखनीय है कि सुरहा ताल एक बहुत बड़ा  प्राकृतिक ताल है, जहां  पूरे वर्ष जल भरा रहता है। बहुत दिनों से इस प्राकृतिक ताल को ‘रामसर साईट’ घोषित करने की मांग चल रही थी, कारण कि यह ताल उन सभी विशेषताओं से युक्त है, जो एक ‘रामसर साईट’ के लिए होना चाहिए। सुरहा ताल जैव विविधताओं से परिपूर्ण है। इस ताल में विभिन्न प्रकार की मछलियों सहित अनेक तरह के जलीय जीव मिलते हैं। साथ ही साथ इस ताल में विभिन्न प्रकार की जलीय वनस्पतियां भी मिलती हैं। 

    सुरहा ताल में विभिन्न प्रकार की रंग – बिरंगी पक्षियों की भी भरमार  रहती है तथा रंग – बिरंगी पक्षियां जाड़े के दिनों में,खासतोर से साइबेरियन  पक्षियां आकर अपनी रौनक से सुरहा ताल की रौनक को और अधिक बढ़ा देती हैं। इन विदेशी पक्षियों के सौन्दर्य एवं कलरव को देखने के लिए पर्यटकों की भरमार लगी रहती है। किंतु इनका अवैध शिकार इनके आगमन में बाधक बन रहा है। इन विदेशी पक्षियों की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि सितम्बर – अक्टूबर तक ये पक्षियां सुरहा ताल में आ जाती  हैं एवं फरवरी – मार्च तक यहां से अपने देश वापस चली जाती हैं। इस दौरान ये पक्षियां इस सुरहा ताल में प्रजनन क्रिया भी करती हैं एवं फिर अपने बच्चों सहित वापस हो जाती हैं।

        सुरहा ताल के चतुर्दिक विभिन्न प्रकार के स्थलीय वन –  वृक्ष एवं झाड़ियां भी पाई जाती हैं। इन्हीं विशेषताओं के कारण सुरहा ताल परिक्षेत्र को पूर्व प्रधानमंत्री श्री चंद्रशेखर जी के प्रयास से ‘पक्षी विहार अभ्यारण्य’ के रूप में पहचान दिलाई गयी। इसके बाद  जलवायु परिवर्तन एवं वन विभाग मंत्रालय द्वारा सुरहा ताल के महत्व एवं इसके अस्तित्व पर उमड़ रहे खतरों को देखते हुए सुरहा ताल परिक्षेत्र को संवेदनशील क्षेत्र ( सेंसेटिव जोन ) घोषित किया गया ताकि,इसके संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निर्माण न हो पाए और प्राकृतिक ताल सुरक्षित एवं संरक्षित रहे। 

      सुरहा ताल अपनी जलीय कृषि के लिए भी प्रसिद्ध है। इस ताल में एक विशेष प्रकार का धान, सिंघाड़ा, कमल-पुष्प एवं कुमुदिनी का पुष्प,एवं विभिन्न प्रकार की स्वादिष्ट एवं सुपाच्य मछलियां मिलती हैं। धान की विशेषता है कि जल का स्तर जितना ऊपर बढ़ता है, धान का पौधा तत्काल बढ़कर जल के ऊपर आ जाता है। इस धान का चावल अत्यन्त स्वादिष्ट एवं सुपाच्य होता है। इस चावल को शुगर के रोगी भी खा सकते हैं। कमल पुष्प के पोंधे से अनेक प्रकार के सुपाच्य आहार भी प्राप्त है ये हैं। इस ताल में प्राप्त मछलियां भी स्वादिष्ट एवं सुपाच्य होती हैं। इस ताल की तलहटी की मिटृटी इतनी उपजाऊ हैती है कि उसका प्रयोग खाद के रूप में किया जा सकता है।

    सुरहा ताल को विकसित कर उसे पर्यटन के रूप में स्थापित करने एवं इसके सुरक्षा एवं संरक्षा हेतु बलिया की पूर्व जिलाधिकारी सौम्या अग्रवाल ने विशेष रूचि दिखाई थी और उनके प्रयास से सुरहा ताल महोत्सव का भी आयोजन हुआ था। इस आयोजन में सुरहा तालों को पर्यटन कू रूप बढ़ाव देने एवं पर्यटकों को आकर्षित करने हेतु ‘नौका विहार’ का भी आयोजन किया गया था , किंतु बाद में नौकायन बंद हो गया। 

    राज्य परिवहन मंत्री श्री दयाशंकर सिंह एवं वर्तमान जिलाधिकारी श्री भवानी प्रसाद सिंह द्वारा भी सुरहा ताल एवं उससे जुड़े कटहल नाला के विकास हेतु एवं पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु भरपूर प्रयास किया जा रहा है। समाचार मीडिया ने भी अपने – अपने समाचार पत्रों एवं पोर्टल समाचार के माध्यम से समाचार का प्रकाशन कर सुरहा ताल के विकास के लिए अलख जगाते रहे। लेखक गण भी अपनी लेखनी से सुरहा ताल को विकसित करने हेतु लेख एवं फीचर लिखते रहे ,जिसे समाचार पत्र प्रकाशित करते रहे।

      आखिरकार सबका प्रयास रंग लाया और 5 जून ,2026 की वह घड़ी आ ही गयी, जब सुरहा ताल को विश्वस्तरीय पहचान मिली और इसे ‘रामसर स्थल’ के रूप में मान्यता मिली और विविधताओं से युक्त यह प्राकृतिक सुरहा ताल रामसर साईट ( रामसर स्थल ) बन कर विश्व में अपनी पहचान बनाकर विश्व स्तरीय- बन गया है।

   अब आवश्यकता इस बात की है कि जिस सतत प्रयास स सुरहा ताल के माध्यम से बलिया को वैश्विक पहचान मिली है, उस वैश्विक पहचान को बनाए रखने एवं उस विश्व में सर्वोत्कृष्ट बनाए रखने हेतु हम सभी निरन्तर प्रयत्नशील रहें और सुरहा ताल एक ऐसा विश्व – स्तरीय पर्यटन स्थल बने कि न केवल भारत के पर्यटकों को आकर्षित करें, बल्कि विदेशी पर्यटकों को भी 

आकर्षित कर यहां आने को प्रेरित करें। सुरहा को विकसित करने में अब अहम् भूमिका हमारे प्रशासन एवं राजनयिकों की होगी कि वो किस तरह से अपना प्रयास कर सुरहा ताल का समन्वित विकास कर सकें।  निश्चित तौर पर अब सुरहा ताल के समन्वित विकास हेतु दृढ़ संकल्प की आवश्यकता होगी।

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