उरई। जनपद जालौन में वृहद पौधरोपण महाअभियान-2026 का शुभारंभ उरई-कालपी रोड स्थित नवीन गल्ला मंडी के समीप आटा में उत्तर प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने पौधरोपण कर किया। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, वन विभाग, विभिन्न विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों, सामाजिक संगठनों, छात्र-छात्राओं तथा बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। इस अवसर पर वृक्षारोपण, कृषि वानिकी और सामाजिक वानिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 12 से अधिक व्यक्तियों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित भी किया गया।
मुख्य अतिथि स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान केवल पौधरोपण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, मातृ सम्मान और प्रकृति संरक्षण का राष्ट्रीय संकल्प है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार माँ जीवन देती है, उसी प्रकार वृक्ष संपूर्ण सृष्टि को जीवन प्रदान करते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी माँ के सम्मान में कम से कम एक पौधा लगाकर उसे वृक्ष बनने तक संरक्षित करना चाहिए।
उन्होंने भारतीय संस्कृति में वृक्षों के महत्व का उल्लेख करते हुए शास्त्रों का प्रसिद्ध श्लोक “दशकूपसमावापी…” उद्धृत किया और कहा कि हमारी परंपरा में एक वृक्ष को दस पुत्रों के समान माना गया है। यह हमारी सभ्यता में प्रकृति और पर्यावरण के सर्वोच्च स्थान का प्रतीक है।
जलवायु परिवर्तन की चुनौती का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा, सूखा, बाढ़ और भूजल स्तर में गिरावट पूरी दुनिया के सामने गंभीर संकट हैं। उन्होंने कहा कि एक विकसित वृक्ष प्रतिवर्ष लगभग 100 से 120 किलोग्राम ऑक्सीजन प्रदान करता है तथा अपने जीवनकाल में एक टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करने की क्षमता रखता है। वृक्षों की अधिकता वाले क्षेत्रों में तापमान भी आसपास की अपेक्षा 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक कम रहता है। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ जल संरक्षण का भी सबसे प्रभावी और स्थायी माध्यम है।
जलशक्ति मंत्री ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में संचालित हरित अभियान की सराहना करते हुए बताया कि पिछले वर्ष एक ही दिन में 36 करोड़ 50 लाख से अधिक पौधे लगाकर नया कीर्तिमान स्थापित किया गया। वर्ष 2017 से अब तक प्रदेश में 190 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं और उत्तर प्रदेश शीघ्र ही 200 करोड़ पौधरोपण का आंकड़ा पार करने की ओर अग्रसर है। उन्होंने बताया कि पौधों की 100 प्रतिशत जियो-टैगिंग, ड्रोन एवं सैटेलाइट के माध्यम से निगरानी तथा वैज्ञानिक संरक्षण की व्यवस्था की गई है, जिसके परिणामस्वरूप पौधों के जीवित रहने की दर लगभग 90 प्रतिशत तक पहुँच गई है। उन्होंने कहा कि नगर वन, मित्र वन, पंचवटी और हरिशंकरी जैसी योजनाओं के माध्यम से हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ किसानों को फलदार, औषधीय और इमारती पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी सशक्त होगी।
उत्तर प्रदेश शासन के कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग के सचिव तथा जनपद के नोडल अधिकारी इंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और कृषि समृद्धि एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने किसानों से कृषि वानिकी अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि फलदार और इमारती वृक्ष किसानों की आय बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. घनश्याम अनुरागी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों, ग्राम पंचायतों और आमजन की सक्रिय भागीदारी से ही हरित अभियान सफल होगा। विधान परिषद सदस्य रमा निरंजन ने महिलाओं और युवाओं से अभियान में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाने का आह्वान किया। सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा ने वृक्षों को जीवन, संस्कृति और समृद्धि का आधार बताते हुए प्रत्येक नागरिक से पौधरोपण के साथ उसके संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की। वहीं माधौगढ़ विधायक मूलचंद्र निरंजन तथा कालपी विधायक विनोद चतुर्वेदी ने भी जनसहभागिता के माध्यम से हरित उत्तर प्रदेश के निर्माण का आह्वान किया।
कार्यक्रम में जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय, पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह, मुख्य विकास अधिकारी के.के. सिंह, प्रभागीय वनाधिकारी प्रदीप कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी, छात्र-छात्राएँ एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। इस अवसर पर विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन किया गया तथा सभी उपस्थित लोगों ने अधिकाधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया।







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