पितृ पक्ष में सद्भावना एकता मंच की अनूठी पहल, 23 लोगों ने किया रक्तदान
उरई। पितृ पक्ष को केवल पूर्वजों के स्मरण और श्रद्धांजलि तक सीमित रखने के बजाय उसे मानव सेवा से जोड़ने की पहल उरई में देखने को मिली। पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और सद्भावना को सामाजिक सेवा का रूप देते हुए सद्भावना एकता मंच के तत्वावधान में मंगलवार को स्टेशन रोड स्थित सिंधी सत्संग भवन में रक्तदान एवं स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में 23 लोगों ने रक्तदान कर जरूरतमंदों के जीवन बचाने में अपना योगदान दिया।
शिविर का शुभारंभ मुख्य अतिथि सिटी मजिस्ट्रेट सुनील कुमार ने फीता काटकर किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता लक्ष्मणदास बाबानी ने की। इस अवसर पर मुख्य अतिथि समेत उपस्थित अतिथियों ने रक्तदान को मानव जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण सेवा बताते हुए लोगों से ऐसे सामाजिक कार्यों में आगे आने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में सीएमओ डॉ. हरिनंदन प्रसाद, एआरटीओ प्रवर्तन राजेश कुमार, एसीएमओ डॉ. वीरेंद्र सिंह, जिला अस्पताल के सीएसएस डॉ. जगजीवन राम, यातायात प्रभारी वीर बहादुर सिंह तथा जिला योग प्रभारी संजय गौड़ विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
रक्तदान करने वालों में प्रवीण, वीर सिंह चंदेल, देवेंद्र कुमार, पुनीत बाबानी, अलीम, सचिन गेढ़ा, रहीश, अमिताभ, मुवीन खान, प्रबल प्रताप सिंह, मोहनलाल रावलानी, आशीष गोयल, आदित्य, चिराग बाबानी, मनीषा, संदीप सिंह, अंजली, नीलम, लक्ष्मणदास बाबानी और महावीर तरसौंलिया समेत अन्य लोग शामिल रहे। मंच की ओर से सभी रक्तदाताओं को प्रमाण पत्र और मेडल देकर सम्मानित किया गया।
शिविर में स्वास्थ्य जांच एवं परामर्श के लिए मेडिकल टीम भी मौजूद रही। डॉ. राहुल कुमार, डॉ. तरुण मुगदल, काउंसलर राहुल कुमार, मणिकेश, हेमलता गोस्वामी, ऋषभ और प्रफुल्ल समेत अस्पताल की टीम ने स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराईं। कार्यक्रम में अतिथियों और मेडिकल टीम के सदस्यों को शाल एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर मंच के संरक्षक केपी सिंह, रामाशरण जाटव, डॉ. प्रशांत निरंजन, उपाध्यक्ष अलीम, सचिव डॉ. ममता स्वर्णकार, कोषाध्यक्ष महावीर तरसौंलिया, संगठन मंत्री शांतिस्वरूप माहेश्वरी, शशि सोमेंद्र सिंह, रजनी सिंह, संतोष प्रजापति और मिथिलेश कुमार नायक समेत अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।
पितृ पक्ष में पुरखों को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित यह रक्तदान एवं स्वास्थ्य शिविर इस मायने में विशेष रहा कि इसमें पूर्वजों की स्मृति को किसी एक परिवार या व्यक्ति की धार्मिक भावना तक सीमित न रखकर उसे व्यापक मानवीय सरोकार से जोड़ा गया। रक्तदान किसी अनजान जरूरतमंद के जीवन की रक्षा कर सकता है और स्वास्थ्य सेवा किसी व्यक्ति को बीमारी से बचाने में मदद कर सकती है। इस दृष्टि से पितरों के प्रति श्रद्धा को मानव सेवा से जोड़ने की यह पहल समाज के लिए एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करती है। ऐसे आयोजन यह भी बताते हैं कि परंपराओं और पर्वों को उनके मूल भाव को बनाए रखते हुए समकालीन सामाजिक जरूरतों से जोड़ा जाए तो वे समाज के लिए नई उपयोगिता और नए क्षितिज पैदा कर सकते हैं।







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