cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngउरई। विद्युत स्टोर के जेई अमित खरे की दिलेरी को सलाम। अगर सीएम अखिलेश यादव भी आ जाये तो उन्हें अपने तरीके से काम करने से नही रोक सकते। यह चैलेंज करने वाला जेई अपने संवर्ग का हीरो बन गया है। उन्होंने एहसास करा दिया है कि जेई अदनी सी पोस्ट नही है बशर्ते उन जैसे कलेजे का जेई हो।
रबी के सीजन में नलकूप धारक किसान फुके ट्रांसफार्मर को बदलवाने में तरस गये। मजाल है कि किसी किसान को बिना आठ से दस हजार रुपये खर्च किये अमित खरे ट्रांसफार्मर मिल जाने दें। उन्होंने स्टिंग आॅपरेशन में कबूला कि जिले और मंडल के अधिकारियों ने भी सिफारिश करके देख ली लेकिन उन्होंने सिद्धांतों से समझौता न किया है और न करेगें। अगर रुपया न मिला तो कोई माई का लाल उनसे ट्रांसफार्मर लेकर बता दे।
हालत यह है कि नये और रिपेयर किये हुए ट्रांसफार्मर स्टोर तक आने के पहले ही बिकवा दिये जाते हैं और जो किसान जेई साहब का इशारा नही समझ पाते वे हफ्तों चक्कर लगाते ही रहते हैं लेकिन मिलने के नाम पर उन्हें अनंतकाल तक सिर्फ जेई का यह जबाव मिल पाता है कि ट्रांसफार्मर की गाड़ी नही आई है कल आ जायेगी और जैसा कि सभी जानते है कि कल कभी आता नही है।
महेबा ब्लाॅक के भगौरा के किसान बुद्ध सिंह चैहान और रविंद्र सिंह चैहान स्टोर पर जेई के लगातार झांसे से माथा ठोकते हुए मिले। उन्होंने बताया कि जेई साहब पूरे एक महीने से उनको बुलवा रहे हैं और हर रोज बैरंग वापस कर देते हैं। जितना किराया वे खर्च कर चुके हैं उतने में तो खुद ट्रांसफार्मर खरीद लेते। इन किसानों ने यह रहस्योदघाटन किया कि छोटे-मोटे अधिकारियों से उनकी शिकायत करने से क्या होता है जब वे यह हौसला रखते है कि सीएम भी उनकी कार्यप्रणाली में बदलाव नही ला सकते।
किसानों ने जिलाधिकारी का ध्यान जेई विद्युत स्टोर के इस महात्म्य की ओर दिलाते हुए उनसे गुहार लगाई कि ऐसे जेई के लिए एन्टी करप्शन और विजीलेंस जैसे बैठे की तनख्वाह लेने वाले विभागों की थोड़ी सेवा ली जाये तांकि यह पता चल सके कि परम स्वतंत्र न सिर पर कोई का उनका भाव कितना थोथा है।

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