12orai01 12orai02उरई। सीएम अखिलेश की प्रदेश अध्यक्षी के समय घोषित समाजवादी पार्टी जिले के विधानसभा प्रत्याशियों को बदल दिया गया है। नये प्रत्याशियों में एक चेहरा मौजूदा परिवहन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के कोटे का माना जा रहा है। नये प्रत्याशी जिले की राजनीति के लिए एकदम अप्रत्याशित हैं जिसको लेकर तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है।
अखिलेश यादव की प्रदेश अध्यक्षी के समय मार्च के महीने में समाजवादी पार्टी के जिन विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशियों की सूची जारी हुई थी उनमें जिले की कालपी और माधौगढ़ विधानसभा सीटें भी शामिल रहीं थी। कालपी से जहां 2012 की चुनावी जोर आजमाइश में जीत की मंजिल छूते-छूते रह गये विष्णुपाल सिंह नन्हू राजा पर फिर से पार्टी ने दाव लगाया था। वहीं माधौगढ़ से पार्टी ने पूर्व जिला पंचायत सदस्य लाखन सिंह कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया था जबकि गत् चुनाव में इस सीट से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार रामपुरा निवासी केशवेंद्र सिंह राजावत रहे थे।
इसी बीच जिला पंचायत अध्यक्ष के उपचुनाव में सपा प्रत्याशी को विष्णुपाल सिंह नन्हू राजा की पत्नी इच्छा राजे का वोट जब नही मिला तो नन्हू राजा को पार्टी से निष्कासित करने की घोषणा कर दी गई। दूसरी ओर लाखन सिंह कुशवाहा से पिछले 10 महीने से जनसंपर्क अभियान में जमकर मेहनत कराई गई जिसमें उनका काफी धन खर्च हो गया। इसके पहले बसपा शासनकाल में लाखन सिंह कुशवाहा ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव लड़ा था जिसमें डेढ़ करोड़ रुपया खर्च करने के बावजूद वे सफल नही हो पाये थे। इस तरह राजनीति में लगातार भारी घाटा झेल रहे लाखन सिंह कुशवाहा के कैरियर पर से बुरे ग्रहों की छाया बरकरार बनी हुई है। इस बार भी चुनाव लड़ने की तैयारी में इतना धन खपाना उनके कोई काम नही आ सका।
उधर कालपी से नन्हू राजा सपा से निष्कासित भले ही हो गये थे लेकिन पार्टी ने उनकी जगह किसी अन्य को उम्मीदवार बनाने में रुचि नही ली थी जिससे यह मान लिया गया था कि देर-सवेर पार्टी उनका निष्कासन निरस्त कर चुनाव के लिए उन्ही पर भरोसा जतायेगी। हाल में जब वीरपाल सिंह दादी को अध्यक्ष बनाने की घोषणा के साथ विष्णुपाल सिंह नन्हू राजा की पार्टी में वापसी का ऐलान भी किया गया तो इसे लोगों ने उक्त धारणा की पुष्टि माना।
लेकिन अब समाजवादी पार्टी की सोमवार को जारी सूची में कालपी क्षेत्र से नन्हू राजा का नाम साफ है। पार्टी ने उनके स्थान पर अनूप कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाने की घोषणा की है। जिनको इसके पहले कालपी के लोग जानते भी नही रहे हैं। हालांकि अनूप कुमार सिंह के परिवार का समृद्ध राजनीतिक इतिहास है। लेकिन कार्यक्षेत्र कालपी की बजाय कानपुर देहात रहा है। उनके पिता अजीत सिंह सरवनखेड़ा से विधायक रह चुके हैं जबकि उनकी पत्नी मलासा से ब्लाक प्रमुख हैं। अनूप सिंह का कालपी से केवल इतना रिश्ता है कि उनकी ससुराल कालपी क्षेत्र में पड़ती है। इसलिए कालपी में उन्हें अपने को सबसे पहले परिचित कराने की ही चुनौती से गुजरना पड़ेगा। जबकि चुनाव के लिए अब कोई समय नही बचा है। इस तरह समाजवादी पार्टी तक के कार्यकर्ता उन्हें कालपी से उम्मीदवार बनाये जाने को नेतृत्व का दुस्साहसिक फैसला व्यक्तिगत बातचीत में बता रहे हैं।
उधर माधौगढ़ से भी पार्टी ने जिनका चयन किया है वे उम्मीदवारी की चर्चा में एक भी दिन नही थे। समाजवादी पार्टी ने माधौगढ़ विधानसभा क्षेत्र से परंपरागत जातिगत समीकरणों की कोई परवाह न करते हुए एमएलसी रमा निरंजन के पति आरपी निरंजन को टिकट थमा दिया है। आरपी निरंजन झांसी पाॅलीटैक्निक काॅलेज के प्रधानचार्य थे लेकिन उन्होंने पत्नी के एमएलसी बन जाने पर स्वैच्छिक सेवा अवकाश ले लिया था। आरपी निरंजन का एक रिश्तेदार गायत्री प्रसाद प्रजापति का बिजनेस प्रतिनिधि बताया जाता है। कहा जाता है कि उसी के अनुशंसा पर रमा निरंजन एमएलसी चुनाव की प्रत्याशी बनाई गईं थी और उसी को कृतार्थ करने के लिए गायत्री प्रसाद प्रजापति ने अब आरपी निरंजन को विधानसभा चुनाव का प्रत्याशी बनवा दिया है। कालपी की तरह माधौगढ़ क्षेत्र में भी समाजवादी पार्टी के लोग नेतृत्व द्वारा घोषित विधानसभा प्रत्याशी के नाम से हैरत में हैं। उधर दूसरी पार्टियों में भी समाजवादी पार्टी में उम्मीदवार बदले जाने को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। प्रतिद्वंदी पार्टियों में इन प्रत्याशियों के नाम सामने आने से कहीं खुशी, कहीं गम का माहौल है।

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