उरई। पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी की पैरोकारी के चलते उरई-जालौन सदर सीट पर निवर्तमान विधायक दयाशंकर वर्मा की सपा से प्रत्याशिता आखिर बहाल हो गई। पहले इस सीट पर उनका टिकट काटकर महेंद्र कठेरिया को उम्मीदवार बना दिया गया था जो कि चुनावी मुकाबले में बेहद हल्के साबित हो रहे थे। इसी बीच टिकट कटने से दुखी दयाशंकर वर्मा ने अपने रिश्तेदार पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी के यहां माथा टेका और उनसे पिछली गल्तियों की माफी मांगी। हालांकि इस दौरान अनुरागी ने अतीत में उनके व्यवहार के लिए उन्हें जमकर खरी खोटी सुनाई। लेकिन दयाशंकर जब सिर झुकाये मदद करने की गुहार लगाते रहे तो आखिर में अनुरागी को पसीजना पड़ा।
नामांकन के अंतिम दिन तक लगता है कि सभी पार्टियों में प्रत्याशियों की अदल-बदल का ड्रामा जारी रहने वाला है। गुरुवार को समाजवादी पार्टी में इसे लेकर धमाका हुआ जब पूर्व घोषित प्रत्याशी महेंद्र कठेरिया का टिकट काटकर निवर्तमान विधायक दयाशंकर वर्मा को प्रत्याशी बनाने का फैसला पार्टी हाईकमान ने घोषित किया।
बताया जाता है कि महेंद्र कठेरिया के एक रिश्तेदार बृजेश कठेरिया सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम के आवास के करीब रहते हैं। दयाशंकर वर्मा के खिलाफ पार्टी में कई शिकायतें थीं। पार्टी के लोगों ने ही उच्च नेतृत्व को बताया था कि वे असाध्य रोग में चिकित्सा सहायता के लिए अपने विधायक निधि से स्वीकृति देने में कमीशन मांगते हैं। उन्होंने पांच सालों तक लोगों का काम करने में कोई दिलचस्पी नही ली केवल पैसा कमाने में लगे रहे। इसलिए अगर उन्हें टिकट दिया गया तो उनकी लुटिया डूब जायेगी। इन शिकायतों से सीएम अखिलेश उनसे वैसे ही भन्नाये हुए थे और किसी नये चेहरे को तलाशने की बात अपने सहयोगियों से कर रहे थे। इसके चलते नरेश उत्तम को मौका मिल गया और उन्होंने अपना कृपा पात्र समझकर महेंद्र कठेरिया को उनके स्थान पर प्रत्याशी बनाने की संस्तुति कर दी। जिससे पार्टी में हड़कंप मच गया।
उधर कठेरिया न तो जातिगत समीकरणों की दृष्टिगत अपना सिक्का जमा पा रहे थे और न ही उनमें राजनैतिक लटके-झटके थे जिससे अनुकूल चुनावी माहौल बनता है। इसलिए अखिलेश यादव को उन पर से भरोसा उठ गया था। लेकिन वे दयाशंकर वर्मा पर कोई मेहरबानी करने को तैयार नही थे। दयाशंकर वर्मा ने कोशिश की कि अखिलेश से उनकी मुलाकात हो जाये लेकिन अखिलेश ने उनसे बात करना तक मंजूर नही किया। आखिर निराश होकर दयाशंकर वर्मा पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी की शरण में पहुंचे।
अनुरागी से दयाशंकर वर्मा से वैसे तो रिश्तेदारी है लेकिन दोनों के बीच छत्तीस का आंकड़ा चल रहा था। दयाशंकर वर्मा ने अनुरागी को नीचा दिखाने का कोई मौका नही छोड़ा था। इस कारण अनुरागी को मनाना उनके लिए आसान नही था। वे जब अनुरागी के पास पहुंचे तो अनुरागी ने उन्हें भरपूर जलील किया। लेकिन दयाशंकर वर्मा जब लगातार अपनी गलती मानते रहे तो अनुरागी को द्रवित होना पड़ा। अनुरागी ने दोबारा भूल न करने की चेतावनी देते हुए उनकी मदद की सहमति दी। अनुरागी के प्रयासो से अंततोगत्वा मुख्यमंत्री को भी हृदय परिवर्तन करना पड़ा। टिकट की घोषणा के बाद दयाशंकर वर्मा गुरुवार की शाम जब लखनऊ से उरई पहुंचे तो अनुरागी के समर्थकों सहित समाजवादी पार्टी के तमाम कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। सपा कार्यकर्ताओं का भी कहना है कि दयाशंकर वर्मा तमाम खामियों के बावजूद महेंद्र कठेरिया से बैटर साबित होगें। उनके भरोसे चुनावी बाजी एक बार फिर पलटने का हौसला संजोया जा सकता है।







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