कोंच-उरई। योगी सरकार ने जिला मुख्यालयों को चैबीस घंटे और तहसील मुख्यालयों को बीस घंटे बिजली आपूर्ति का जो झुनझुना पकड़ाया था वह वक्त के साथ जंग खाकर टूट कर बिखर गया है। निर्धिारित रोस्टिंग शैड्यूल के इतर लोकल फॉल्ट और इमरजेंसी कटौती के नाम पर कई कई घंटे बिजली गुल रहने से इस भीषण उमस भरी गर्मी में नागरिकों का जीना मुहाल हो गया है। गौरतलब है कि विभाग द्वारा कोंच तहसील मुख्यालय के लिये चार घंटे की कटौती का शैड्यूल बनाया गया है जिसमें सुबह पांच से छह बजे, दोपहर साढे दस से साढे बारह तथा शाम को पौने छह से पौने सात बिजली काटने का प्रावधान किया गया था। अमूमन देखने में आ रहा है कि इन घंटों में कभी कभी कटौती नहीं भी होती है जिसके एवज में रात में थोक के भाव बिजली काटी जाती है जिससे नागरिकों को इस भीषण उमस भरी गर्मी में बूढों और बच्चों के साथ समय काटना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा लोकल फॉल्ट भी शट डाउन का सबब बन कर नागरिकों को रुलाते हैं। इस बाबत विभागीय अधिकारी भी खुद को असहाय और असहज महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि ऊपर से उन्हें कोड का मैसेज आता है और उसी के अनुरूप उन्हें बिजली काटनी पड़ती है। बहरहाल, इस स्थिति को लेकर नागरिकों में रोष व्याप्त है। मैंथा गल्ला व्यापारी कल्याण समिति के अध्यक्ष अजय रावत, किराना व्यवसायी कमलेश गिरवासिया तथा कांग्रेस नगर अध्यक्ष प्रभुदयाल गौतम ने मांग की है कि निर्धारित शैड्यूल के मुताबिक ही कटौती की जावे क्योंकि नागरिकों को उसके बाबत पर्याप्त जानकारी है। अघोषित कटौती के कारण रातों की नींद हराम है और वाटर सप्लाई भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

बिजली कटौती का कोड मेरे हाथ में नहीं-एसडीओ

इस इमरजेंसी रोस्टिंग को लेकर जब विद्युत विभाग के एसडीओ कौशलेन्द्र सिंह से पूछा गया तो उनका कहना था कि उनके हाथ में कुछ भी नहीं है, यह कटौती ऊपर से है। उनके पास तो कोड का मैसेज आता है और उन्हें उसी के मुताबिक बिजली काटनी पड़ती है।

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