
उरई। दलित उत्पीड़न के मामले के निवारण एवं पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए राजधानी लखनऊ में दलित उत्पीड़न निवारण एवं सशक्तीकरण केन्द्र की स्थापना की जाएगी।
आज यहां पत्रकारों से वार्ता करते हुए भारतरत्न बोधिसत्व बाबा साहब डा. भीमराव अंबेडकर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा.लालजी प्रसाद निर्मल ने इस आशय की जानकारी देते हुए बताया कि अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के शिकायतों के निस्तारण तथा उनके अनुश्रवण के लिए विधानसभा के सामने स्थित अंबेडकर महासभा परिसर लखनऊ में यह केन्द्र स्थापित किया जा रहा है। जिसका उद्घाटन बाबा साहब डा. अंबेडकर के परिनिर्वाण दिसव छह दिसम्बर 17 को उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रामनाईक द्वारा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस केन्द्र में प्राप्त शिकायतों का तत्काल पंजीकरण कर इन्हें संबंधित जिला के प्रशासनिक अधिकारियों को निस्तारण के लिए भेजा जाएगा तथा उच्च स्तर पर भी इन शिकायतों को अग्रसारित कर उनकी मानीटरिंग की जाएगी। दलित उत्पीड़न के गंभीर मामलों में डा. अंबेडकर महासभा की टीम घटना स्थल का दौरा कर फैक्ट फाइडिंग करेगी और प्राथमिकी दर्ज कराने से लेकर दोषियों को सजा दिलवाने के लिए विधिक सहायता भी लेगी। डा. निर्मल का कहना था कि अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के बारे में लोगों को प्रशिक्षण देकर जागरुक किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अंबेडकर महासभा के द्वारा प्रत्येक जनपद में एक संयोजक की नियुक्त की जा रही है जिसे दलित उत्पीड़न एक्ट के साथ दलित उद्यमिता प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि महासभा का जालौन जिले का संयोजक पंकज सहाय दोहरे को नियुक्त किया गया। इसके अलावा जालौन से दलित एक्टीविस्ट कुलदीप बौद्ध और भग्गूलाल बाल्मीकि को दलित उत्पीड़न केन्द्र के निदेशक मंडल के सदस्य के रूप में नामित किया गया है जबकि केन्द्र के निदेशक जयशंकर सहाय होगे। उन्होंने बताया कि डा. अंबेडकर महासभा की दस सदस्यीय कमेटी जालौन जिले के दौरे पर आई हुई है। टीम ने जनपद के काशीरामपुर में पिछले माह हुई अंबेडकर प्रतिमा के अपमान के मामले की भी जांच की और जिले में हाथ से मानवमल उठाने की पेशे में लगे लोगों से मुलाकात कर उनके बयान दर्ज किए। अंबेडकर महासभा दलित उत्पीड़न तथा मैनुअल एक्वेजिंग के प्रकरण की रिपोर्ट तैयार कर इसे प्रदेश के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री को सौपेगे। डा. निर्मल ने बताया कि विगत 14 सितम्बर को भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अंबेडकर महासभा में आये थे तो उनके समक्ष भी मैनुअल एक्वेजिंग का मामला उठाया गया तथा तथा यह मांग की गई थी कि रामकृष्ण और बुद्ध की धरती से इस प्रथा को समाप्त करने के लिए इस पेशे में लगे सभी लोग को सेवा नियोजित कर इस पेशे से प्रदेश को मुक्त कराया जाए। प्रेस वार्ता में रामनरेश चैधरी, डा. सत्यादोहरे, अमरनाथ प्रजापति, विक्रम सुमन, अखिलेश, कृष्ण मोहन साक्षी विद्यार्थी, भग्गूलाल बाल्मीकि, कुलदीप बौद्ध, पंकज सहाय दोहरे, विजय कुमार, नरेन्द्र प्रताप सिंह आदि उपस्थित रहे।







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