
उरई । एक फरवरी को देश का बजट आने के बाद व उत्तर प्रदेश सरकार के 2018-19 बजट आने से पहले बजट विश्लेषण व मांग को लेकर बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच, दलित आर्थिक अधिकार आंदोलन द्वारा सरकार पैलेस, उरई-जालौन में 2018-19 बजट में दलितों आदिवासियों के लिए क्या है प्रावधान? विषय पर चर्चा में मीडिया से संवाद किया।
मंच के कुलदीप बौद्ध ने बताया कि केंद्रीय बजट 2018-19, नई वित्तीय योजना के तहत योजना एवं गैर-योजना पहलुओं के विलय के बाद दूसरा, साथ ही साथ जीएसटी की शुरुआत के बाद से पहला बजट है। केंद्रीय बजट 2017-18 में, एससी,एसटी के कल्याण मॉडल की ओर एक मूलभूत बदलाव किया गया था, अनुसूचित जाति उप योजना और जनजातीय उप योजना को पुनर्जीवित करने के लिए इसे अनुसूचित जाति घटक एवं अनुसूचित जनजाति घटक बना दिया गया (इसलिए एससीसी, एसटीसी) इसे एक अनुचित अपरिवर्तनीय कदम बनाकर, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को कल्याणकारी कार्यक्रमों का मात्र लाभार्थी बना दिया। इस बदलते हुए नए परिस्थिति में, एससीसी-एसटीसी की तरफ से आवंटन की कुल मात्रा पुरे केंद्रीय बजट के 30: के खिलाफ है। हालांकि इस दृष्टिकोण में बदलाव के बावजूद सरकार द्वारा कोई भी दिशानिर्देश पेश करने के लिए वर्ष में कोई कदम नहीं उठाया गया जिससे सरकार को जवाबदेह रखने में मुश्किल हो रही है।
केंद्रीय बजट के विश्लेषण को रखते हुए बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच के संयोजक कुलदीप कुमार बौद्ध ने कहा कि वित्त मंत्री जी ने रु 24, 42,213.30 करोड़ का बजट व्यय पेश किया। एससीसी-एसटीसी के अंतर्गत आबंटन अनिवार्य राशि से काफी नीचे है। योजना और गैर-योजना अनुमान के विलय की स्थिति में, आवंटन केन्द्रीय प्रायोजित स्कीम एवं सेंट्रल सेक्टर स्कीम के तहत किया गया है (अतः सीएस एवं सीएसएस) यह दोनों विकासात्मक लागत से संबंध रखते हैं। केन्द्रीय प्रायोजित स्कीम एवं सेंट्रल सेक्टर स्कीम के तहत दलित एवं आदिवासियों के विकास के लिए बहुत कम है एवं उनकी जनसंख्या के अनुपात से कम नही है, जो 2011 की जनसंख्या के अनुसार एससी के लिए 16.6ः एवं एसटी के लिए 8.6ः है। वर्तमान वर्ष में कुल व्यय बजट का दलितों के लिए सिर्फ रुपए 56,619 करोड़ आवंटित किया गया है जो 6.55ः है जबकि 143,000 करोड़ होना चाहिए था लेकिन 86,000 करोड़ रुपये दलितों को कम दिया है वही आदिवासियों के लिए रुपए 39,135 करोड़ जो 4.53ः है। जबकि 74,000 करोड़ होना चाहिए था लेकिन 34,000करोड़ रुपये कम दिया है, कुल मिलाकर दलितों आदिवासियों को 108,000 करोड़ रुपये कम दिया है। अनुसूचित जाति घटक एवं अनुसूचित जनजाति घटक के तहत दलित एवं आदिवासियों के लिए यह आवंटन अधिकृत राशी से क्रमशः 10.5ःएवं 4.07ः कम है।
केंद्रीय बजट 2018-19 पर टिप्पणी करते हुए राष्ट्रीय दलित मानवाधिकार अभियान के रिहाना मंसूरी व नंदकुमार ने कहा, “जब हम विकलांग छात्रों के छात्रवृत्ति के लिए रुपए 12.56 करोड़ के आवंटन का स्वागत करते है, पर उच्च शिक्षा के लिए हानिकारक है एवं उस से भी अधिक चिंताजनक नीती आयोग द्वारा एससीसी और एसटीसी को डिजाइन करने के लिए दिशा निर्देशों की कमी है और संबंधित मंत्रालयों ने विशेष घटक योजना को और भी कमजोर किया है जिसे विकास के अंतर को कम करने के लिए बनाया गया है। इस दौरान कुलदीप कुमार बौद्ध, रिहाना मंसूरी, अनुराधा चौधरी, गुलफ्सा, नंदकुमार, अनीता, कृष्णकुमार प्रजापति, शिवराम पाल, संजय बाल्मीकि उपस्थित रहे।







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