उरई। शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र में मामा गिरोह का अच्छाखासा आतंक देखने को मिल रहा है जो परिवार के सदस्यों के बाहर होने पर घर में बच्चों को मामा बताकर प्रवेश कर जाते है और फिर नगदी जेवरात उड़ाकर रफूचक्कर हो जाते है।
कोतवाली उरई क्षेत्र के ग्राम करसान में विजय नारायण पुत्र परशुराम पाल चार अप्रैल को दिन के समय खेतों में कटाई के काम में लगे हुए थे। घर में दो बच्चियां नदंनी आठ वर्ष व दीपिका छह वर्ष अकेली थी तभी मोटर साइकिल पर सवार दो लोग उसके घर में पहुंचे और बच्चियों को मामा बताकर अंदर घुस गए। बाद में बच्चियों को पैसे देकर दुकान से कोल्ड्रिक लाने के लिए घर से बाहर भेज दिया और फिर अज्ञात मामा चोरों ने घर में रखे बीस हजार रुपये नगद, दो जोड़ी पायल, एक कमरबंद, ब्रजवाला, झुमकी, जंजीर, अंगूठी, चार सोने के कंगन, हार, मंगलसूत्र चोरी करके भाग गए। जब शाम के समय विजय नारायण पत्नी के साथ घर लौटा तो सारा सामान बिखरा पाकर उसके होश उड़ गए। जब बच्चियों ने बताया कि कोई मामा आये थे जिन्होंने उसे पैसे देकर कोल्ड्रिक लाने के लिए दुकान पर भेजा था और जब वह लौटकर आई तो वह घर में नही थे। घटना की सूचना तत्काल डायल 100 को दी गई जहां पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मौका मुआयना किया। हालांकि घटना की प्राथमिकी पुलिस अभी तक दर्ज नही कर पाई थी।
ऐसा ही एक मामला शहर के स्टेशन रोड डायमंड होटल के पीछे मोहल्ला तुलसीनगर का सामने आया है। जहां पुलिस को दी गई तहरीर में श्रीमती नीलू पत्नी स्व. रामकृष्ण ने बताया कि वह घर पर नही थी घर पर बच्चियां थी तभी दो लोग अपने को रिस्तेदार बताकर घर में घुस आये और बच्चों को गुमराह करके नगदी जेवरात चोरी कर ले गये। पुलिस ने इस मामले की प्राथमिकी धारा 380 आईपीसी के अंतर्गत दर्ज कर ली है। उल्लेखनीय है कि मामा चोर गिरोह ऐसे घरों की चाहे शहर हो या गांव हो निगरानी करता है जहां दिन के समय घर के लोग कामकाज से बाहर चले जाते है और घर में बच्चे रह जाते है। जो अपने को रिस्तेदार बताकर बच्चों को गुमराह कर जेवर नगदी चोरी करने में सफल हो जाते है। हालांकि तमाम घटनाएं प्रकाश में आने के बाद भी पुलिस अभी तक इस मामा चोर गिरोह का अब तक भंडाफोड़ नही कर पाई है।







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