• सुबह नौ से शाम सात बजे तक तौलाई के निर्देश के बाबजूद तड़के चार बजे तौलाई आखिर क्यों

कोंच—उरई । किसानों को गेहूं का समुचित मूल्य देने के लिये समर्थन मूल्य 1735 रुपये प्रति कुंतल के हिसाब से खरीदने के लिये सरकार ने दर्जनों क्रय केन्द्र खोले हैं जिन पर सुबह नौ से शाम सात बजे तक ही तौलाई के सख्त निर्देश दिये गये हैं। इसके विपरीत शुक्रवार को गल्ला मंडी में मुंह अंधेरे चार बजे नीलामी चबूतरे पर लगे कांटों और हो रही तौलाई को लेकर कान खड़े होना लाजिमी है क्योंकि जिस जगह तौलाई हो रही थी वहां किसी क्रय केन्द्र का बैनर उस वक्त तक नहीं लगा था लेकिन बाद में आनन फानन वहां बैनर टांगे गये। बताया गया है कि मंडी में नीलामी चबूतरे पर सैकड़ों कुंतल गेहूं के ढेर लगे थे और तौलाई का काम जारी था लेकिन सुबह तकरीबन आठ बजे वहां पहुंचे मीडिया कर्मियों व एसडीएम को देख पल्लेदार भाग खड़े हुये। बताते चलें कि किसी ने एसडीएम को इस बात की सूचना दी थी जिस पर वे मौके पर पहुंचे थे। हालांकि एसडीएम ने अभी यह नहीं बताया है कि उन्होंने वहां क्या पाया लेकिन यह जरूर कहा है कि नियम विरुद्घ कार्य नहीं होने दिया जायेगा। बड़ा सवाल यह है कि मुंह अंधेरे में तौलाई किसानों के माल की तो हो नहीं सकती है, निश्चित रूप से यह माल व्यापारियों का रहा होगा जिसे अंधेरे में ठिकाने लगाने की जुगत बनाई गई होगी। जो तथाकथित किसान मौके पर मौजूद मिले वे यह भी नहीं बता सके कि वे अपना माल किस केन्द्र पर तौला रहे हैं। ऐसे ही एक तथाकथित किसान पप्पू पुत्र मानसिंह गुरावती से जब पूछा गया कि कौन से केन्द्र पर वह अपना माल लाये हैं तो वह केन्द्र का नाम नहीं बता सके। ऐसी स्थिति में केन्द्रों की मॉनीटरिंग करने बाले अधिकारियों की जिम्मेदारी और भी बढ जाती है कि कहीं किसानों का हक कोई और तो नहीं मार रहा है।

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