उरई। जिला कारागार में 24 अप्रैल से चल रहे अगरबत्ती प्रशिक्षण का समापन ग्राम स्वराज अभियान तथा आजीविका एवं कौशल विकास दिवस के अवसर पर शनिवार की शाम अपर जिलाधिकारी प्रमिल कुमार सिंह ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा ने की। अपर पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र तिवारी और जिला विकास प्रबंधक प्रकाश कुमार भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि प्रमिल कुमार सिंह ने इस अवसर पर बंदियों को संबोधित करते हुए कहा कि लोगों का जन्म तो एक जैसा होता है लेकिन परिस्थितियों की भिन्नता के कारण उनके मन-मस्तिष्क अलग-अलग हो जाते हैं। परिस्थितियां मुनष्य को अपराध की दुनियां में कदम रखने के लिए मजबूर कर देती हैं। लेकिन ऐसा नही है कि किसी इंसान में बदलाव न किया जा सके। उन्होंने कहा कि जिला जेल के प्रशासन ने इसीलिए बंदियों को रचनात्मक कार्यों से जोड़ने का जो अभियान चला रखा है उसके द्वारा बंदियों में सकारात्मक बदलाव के शानदार उदाहरण सामने आने की आशा है। उन्होंने उरई कारागार प्रदेश के आदर्श कारागार के रूप में स्थापित होने की आशा जताई।
आरसेटी निदेशक देवेंद्र द्विवेदी ने कहा कि अगरबत्ती निर्माण सीखने से जेल से बाहर निकलने के बाद आपको समाज की मुख्य धारा से जुड़ने का एक बेहतर प्लेटफार्म मिलेगा। जिला विकास प्रबंधक प्रकाश कुमार और डूडा के सहायक परियोजना अधिकारी रंजीत कुमार ने बंदियों को जेल में समूह बनाकर व्यवसायिक स्तर पर अगरबत्ती निर्माण के लिए बैंक ऋण सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। आरसेटी के संकाय रोहित त्रिपाठी ने कार्यक्रम का संचालन किया। बंदियों के प्रशिक्षणकर्ता प्रणव श्रीवास्तव व रवि श्रीवास्तव भी उपस्थित रहे। रामनारायण शिवहरे, अमरदीप दुबे, सचिन, निर्दोष, जावेद और संदीप सहित 35 बंदियों को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र वितरित किये गये। कार्यक्रम में प्रभारी कारापाल राघवेंद्र सिंह, उप कारापाल बसंत कुमार शर्मा, और सुशील कुमार पाण्डेय भी उपस्थित रहे।





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