
उरई-जालौन, एक तरफ गावं जिला व प्रदेश को ओ.डी.एफ. किया जा रहा है वही जालौन जिले के सैकड़ों गावं की महिलाये जिलाधिकारी कार्यालय आकर मांग कर रही है – साहब! मेरा शौचालय कब बनेगा??? जी हाँ पिछले 24 सितम्बर को जिला मुख्यलय पर सामाजिक संगठन – बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच के नेतृत्व में आयोजित – जन पंचायत में महेवा व कदौरा ब्लॉक के 65 से अधिक गावं की हजारों महिलाओं ने आकर अपने अपने आवेदन के साथ शौचालय निर्माण की मांग की थी व अपर जिलाधिकारी महोदय को अपना पांच सूत्रीय ज्ञापन दिया था उसी से क्रम में आज जन पंचायत में आये 1058 आवेदन को लेकर मंच की टीम ने जिलाधिकारी जालौन – डॉ. मन्नान अख्तर जी मिलकर चर्चा की व वास्तविक हकीकत रिपोर्ट को सोंपा व सभी आवेदन दिये जिस उन्होंने जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में जाकर सभी आवेदन रिसीव कराने का ऑर्डर दिया जिस पर टीम ने सभी आवेदन जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में रिसीविंग कराकर जल्द सभी के शौचालय निर्माण करवाने की मांग की !
इस दौरान महेवा व कदौरा विकास खंड के गावों में ओ.डी.एफ गावं व स्वच्छ भारत मिशन(ग्रामीण) की जमीनी हकीकत को लेकर स्टडी करने बाली टीम– रिहाना मंसूरी, रामकुमार गौतम, रीता विश्वकर्मा, कृष्ण कुमार प्रजापति, धर्मपाल राजपूत, नीलिमा,शिवराम पाल, अनीता राज, कल्पना बौद्ध, राजकुमार जाटव, संजय वाल्मीकि, विमल बौद्ध व राजेश्वरी गौतम ने गावं की वास्तविक हकीकत रिपोर्ट के साथ बताया की गावं की महिलाएं कहती है की शौचालय न होने से हम महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी होती है, हम बार बार प्रधान व सचिव के चक्कर लगा रहे वो सुन ही नहीं रहे हमें अपना शौचालय बनवाना है हमारा शौचालय बनवाया जाये,वही की गावं में शौचालय के नाम पर सिर्फ खाना पूर्ति की जा रही है, गावं में गड्डे खुदे पड़े हुए है, लोगों को शौचालय निर्माण का पैसा ही नहीं दिया जा रहा है,गावं के जो बृद्ध व दिव्यांग लोग है उन्हें बहुत ही दिक्कतों का सामना करना पढता है, और बरसात के दिन तो इनके लिए नर्क बनकर गुजरते है,सरकार बाते तो करती है की घर हर में शौचालय हो लेकिन आर्थिक स्तिथि ख़राब होने से वो अपनी आजीविका भी नहीं चला पा रहे तो शौचालय कैसे बनाये?और सरकार के दुवारा मिलने बाली सहायता राशि मिल ही नहीं रही,तो अब ये हर घर में शौचालय कैसे बने ! बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच के संयोजक- कुलदीप कुमार बौद्ध ने कहा की सरकार स्वच्छता को लेकर बड़े बड़े अभियान चला रही है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है मंच दुवारा जालौन जिले के दो ब्लॉक महेवा व कदौरा में की गई स्टडी से चौकने बाले तथ्य सामने आये है जहाँ एक और मरगयां,जैसे दर्जनोंगावं में आज भी शुष्क शौचालय बने है जहाँ गावं की बाल्मीकि महिलाएं उन्हें रोज अपने हाथों से साफ़ करती है, और जिले में बड़े पैमाने पर मैला ढ़ोने की कुप्रथा जारी है वही जिले को व गावों को ओ.डी.एफ. किया जा रहा है, गावं में महिलाएं खुले तोर पर शौचालय बनवाने की मांग कर रही की साहब मेरा शौचालय कब बनेगा? फिर भी उनकी कोई नहीं सुन रहा,बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच की टीम जन पंचायत में आये सभी आवेदन आज जिलाधिकारी महोदय को सोंप रही है,यदि जल्द ही इस पर कार्यवाही नहीं होती तो इस मुद्दे को लेकर विधान सभा लखनऊ तक आन्दोलन होगा!
24 सितम्बर की जिला मुख्यालय पर – जन पंचायत :
बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच दुवारा 24 सितम्बर को जिला मुख्यालय पर “जन पंचायत” जिले की 60 से अधिक गावं की हजारों महिलाओं के शौचालय निर्माण के आवेदनों के साथ की गई थी, जिसमे मंच दुवारा जिले के ओ.डी.एफ गावं व स्वच्छ भारत मिशन(ग्रामीण) की जमीनी हकीकत स्टडी रिपोर्ट को प्रस्तुत किया गया, जिसने ओ.डी.एफ की पूरी पोल खोल दी ! बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच दुवारा जनपद के दो ब्लॉक महेवा व कदौरा में गावं गावं जाकर एक स्टडी किया जिसमे ओ.डी.एफ. गावं व स्वच्छ भारत मिशन(ग्रामीण) की हकीकत को जाना की गावं में आज भी 50 प्रतिशत घरों में भी शौचालय पूर्ण रूप से नहीं बने, ज्यादातर घरों के सामने सिर्फ गड्ढे खुदे हुए अधूरे निर्माण के शौचालय पड़े हुए है ?यहाँ तक की मरगायां,मंगरोल जैसे दर्जनों गांव में आज भी शुष्क शौचालय बने है जहाँ पर रोज बाल्मीकि समुदाय की दलित महिलाएं हाथ से मैला ढ़ोने का कार्य करती है! सैकड़ों गावं की महिलाओं ने अपने अपने शौचालय निर्माण करवाने हेतु हजारों आवेदाओं के साथ अपर जिलाधिकारी को 5 सूत्रीय ज्ञापन सोंप गुहार लगाई की साहब ! मेरा शौचालय कब बनेगा ?
जन पंचायत के ज्ञापन की ये थी प्रमुख मांगे –
1- जनपद में ओ.डी.एफ. किये गए गावों की हकीकत जानने हेतु जिले में एक विशेष जाँच(निगरानी) समिति का गठन कर पुन: जाँच कराई जाये व उसकी वास्तविक रिपोर्ट सामने लाई जाये !
2- ज्ञापन के साथ महेवा व कदोरा विकास खंड के संलग्नक विभिन्न गावं के आवेदनों को लेकर – जिला पंचायत राज अधिकारी, खंड विकास अधिकारी,सचिव व ग्राम प्रधानों को जल्द से जल्द शौचालय निर्माण करवाने हेतु पत्र लिखा जाये व उसका फालोअप हो !
3- जिन लाभार्थियों को शौचालय निर्माण की दुतीय क़िस्त का पैसा नहीं दिया गया है तुरंत उनके खातों में पैसा भेजा जाये !
4- जिन गावं में आज भी शुष्क शौचालय बने हुए है उनको नष्ट कराते हुये मानकानुसार स्वच्छ शौचालय बनाये जाये व शुष्क शौचालय की सफाई करने वाले / हाथ से मैला उठाने बाले परिवारों का कानून के हिसाब से साथी पुनर्वास कराया जाये!
5- जिले के प्रतेक गावं व प्रतेक घर में साफ़ व स्वच्छ शौचालय(इज्जत घर) तत्काल प्रभाव निर्माण कराना सुनिश्चित किया जाये!






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