कोंच-उरई । धर्मादा रक्षिणी सभा द्वारा संचालित कोंच की ऐतिहासिक रामलीला के 166वें महोत्सव की पहली प्रस्तुति के रूप में बीती रात रामलीला रंगमंच पर नारदमोह लीला का सफल मंचन किया गया। इसके माध्यम से आम जनमानस को यह जताने का प्रयास किया गया कि भगवान राम के अवतार का हेतु क्या है। लीला के माध्यम से भगवान शंकर मां पार्वती को बताते हैं कि जगत पिता भगवान बिष्णु की इच्छा से ही उन नारद जिन्होंने काम को जीत कर कामजीत की उपाधि प्राप्त की, के मन में आसक्ति और विवाह की इच्छा जागृत हुई और इसकी परिणति में नारद ने भगवान बिष्णु को पत्नी वियोग का श्राप दिया तथा भगवान श्रीहरि ने राम के रूप में अयोध्या नरेश दशरथ के यहां पुत्र रूप में अवतार धारण कर पृथ्वी से अधर्म का नाश कर धर्म की स्थापना की।

 

लीला के दौरान दर्शाया गया कि कामजीत होने का नारद को जब अहंकार हो गया और तीनों लोकों में वे अपने कामजीत होने का डंका पीटने लगे तो भक्तों पर सदा अपना वरदहस्त बनाये रखने बाले करुणानिधान भगवान श्रीहरि ने अपने परम भक्त नारद का अहंकार नष्टï करने के लिये योगमाया के सहयोग से मायानगरी का निर्माण कराया और नारद के मन में आसक्ति और विवाहेच्छा का भाव जागृत किया। जब नारद ने बिष्णु से सुंदर मुख मांगा ताकि राजकुमारी शीलमणि उनके कंठ में वरमाला डाल कर उनका वरण कर सके तो भगवान ने उन्हें वानर रूप प्रदान कर दिया जिसके कारण वे हास्य के पात्र बने। अपनी इस दुर्दशा पर क्रोधित नारद ने भगवान बिष्णु को श्राप दे दिया कि जिस तरह उन्हें पत्नी सुख नहीं प्राप्त हो सका है ठीक उसी प्रकार उन्हें भी पत्नी वियोग सहना पड़ेगा। नारद द्वारा दिया गया यही श्राप रामावतार का हेतु बना। नारद का अभिनय सुशील दूरवार मिरकू, शंकर का रवि दुवे, पार्वती का कैलाश नगाइच, गोस्वामी तुलसीदास का पं. संतोष त्रिपाठी, बिष्णु का ओमप्रकाश उदैनिया, ब्रह्मïा राजेन्द्र भारद्वाज, राजा शीलनिधि रामकिशोर पुरोहित, कामदेव सूर्यदीप सोनी, अप्सरा ऋतिक याज्ञिक, नंदी अभिषेक रिछारिया, घनचक्कर साकेत सोनी, लकी दुवे, शिवम बबेले, विक्की दुवे आदि ने किरदार निभाये। व्यासजी की भूमिका चंद्रशेखर नगाइच, समाजी की भूमिका वीरेन्द्र त्रिपाठी ने निभाई।

 

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