उरई। एससी एसटी एक्ट में कठोर प्रावधान बनाये जाने के बावजूद सदियों से चली आ रही अत्याचार पूर्ण समाज व्यवस्था के कारण दलितों का उत्पीड़न बंद नही हो रहा है। यहां तक कि पंचायती राज व्यवस्था में आरक्षण के कारण प्रधान चुनने वाले दलितों को भी भेदभाव और दमन का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थितियों की भुक्तभोगी थाना रेढ़र के इटौरा की प्रधान लीलावती दोहरे ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर अपने गांव के दबंगों की शहजोरी का रोना रोया।
महिला दलित प्रधान ने बताया कि कुलदीप कुमार पाठक व उसका भाई संदीप कुमार पाठक जातिगत अंहकार के कारण उसे कार्य नही करने दे रहे और जोर-जुल्म कर रहे हैं। कुलदीप कुमार पाठक पहले पंचायत मित्र के रूप में काम करता था जिसे अधिकारियों ने अनियमितताओं के कारण बर्खास्त कर दिया था। अपनी बहाली के लिए दबाव बना रहे कुलदीप कुमार पाठक ने गत 3 अक्टूबर को उसे उसके जानवरों वाले बाड़े के पास घेर लिया। पाठक ने इस दौरान उसे मां-बहन की गाली दीं और अभद्र हरकत भी की। घर आकर उसने अपने पति को इस बारे में बताया तो उसके पति रघुवीर शरण कुलदीप से बात करने उसके घर चले गये। इस पर कुलदीप और भड़क गया और उनके साथ भी उसने गाली-गलौज शुरू कर दी। तब तक वह और उसके बेटे कुलदीप कुमार के घर पहुंच गये उन्हें देखकर कुलदीप कुमार अवैध पिस्टल लहराते हुए अपनी गाड़ी मौके पर छोड़कर भाग निकला। जिसकी चाबी उसने निकाल ली।
महिला प्रधान ने बताया कि कुलदीप कुमार व उसका भाई संदीप आपराधिक प्रवृत्ति के जो हत्या के एक मामले में आरोपित रह चुके हैं। उनके दुश्मनी मानने से वह और उनका पूरा परिवार आतंकित है। सोमवार को जब वह रेढ़र थाने में उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए शिकायत करने जा रही थी तो उसे पता चला कि कुलदीप का भाई संदीप रास्ते में पांच-छह लोगों के साथ उसकी तांक में खड़ा है। इस पर वह चकमा देकर वहां से चली आई और जिला मुख्यालय पर आपके सामने प्रार्थना पत्र देने पहुंची। पुलिस अधीक्षक ने जांच के आदेश कर दिये हैं।






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