* पुष्प वाटिका व जनक बाजार लीला का हुआ मंचन

* खचाखच भरा था रामलीला ग्राउण्ड, रंगकर्मियों की बेजोड़ प्रस्तुतियों ने बटोरी तालियां

कोंच-उरई । सोमवार की रात्रि कोंच की सांस्कृतिक धरोहर ऐतिहासिक रामलीला में पुष्प वाटिका और जनक बाजार लीला का प्रभावोत्पादक मंचन रामलीला के श्रेष्ठ रंगकर्मियों द्वारा किया गया। सीता स्वयंवर देखने अपने गुरु विश्वामित्र के साथ जनकपुर पहुंचे दाशरथि राम और लक्ष्मण गुरु की आज्ञा पाकर जनकपुर भ्रमण पर निकलते हैं। बाजार में बैठे दुकानदार और व्यवसायी उनकी मोहिनी छवि देखकर उनसे बात करने को आतुर हो उठते हैं और उन्हें रिझाने के लिये अपनी वाणिज्यिक वस्तुओं की बड़ाई करने लगते हैं। जनकपुर की महिलायें और बालायें भी उन दोनों की एक झलक पाने को आतुर दिखती हैं। बाद में गौरी पूजन के लिये आई जनकनंदिनी सीता (शक्ति) और राम (ब्रह्मï) का पुष्प वाटिका में चक्षु मिलन होता है। इस दौरान रामलीला ग्राउंड दर्शकों से खचाखच भरा था।

गल्ला व्यापारियों की नगर की सबसे बड़ी धार्मिक संस्था धर्मादा रक्षिणी सभा द्वारा संचालित कोंच की ऐतिहासिक और विश्व प्रसिद्घ रामलीला के जारी 166वें महोत्सव में सोमवार की रात्रि रामलीला रंगमंच पर पुष्पवाटिका और जनक बाजार का बड़ा ही सुंदर और प्रभावोत्पादक मंचन किया गया। यज्ञ की रक्षार्थ महर्षि विश्वामित्र के साथ गये अवधकिशोर राम और लक्ष्मण ताड़का और सुबाहु बध के बाद सीता स्वयंवर देखने गुरु विश्वामित्र के साथ जनकपुर पहुंचे जहां मार्ग में पाषाण शिला बनी पड़ी अहिल्या का राम ने उद्घार किया और महाराज जनक के अतिथि भवन में विश्राम किया। गुरु आज्ञा पाकर दोनों भाई जनकपुर अवलोकन के लिये निकलते हैं। दोनों भाइयों की मोहिनी छवि देखने के लिये जनकपुर की अट्टालिकाओं पर महिलाओं और बालाओं की कतारें लगी हैं। जब दोनों भाई जनक बाजार में पहुंचते हैं तो उनकी मनोहारी छवि देख कर दुकानदार भी ठगे से रह जाते हैं और उनसे बात करने के लिये अपनी अपनी वाणिज्यिक वस्तुओं की बड़ाई करने लगते हैं। मालिन, पान बाली, चूड़ी बाली, खिलौने बाला, कूंजड़ी तथा सर्राफों, मिष्ठान्न विक्रेताओं आदि ने गीतों से मंचन में चार चांद जडऩे का काम किया। हास परिहास का भी भरपूर इंतजाम किया गया था जिन्हें देख दर्शकों के पेट फूल गये।

बाद में पुष्प वाटिका में गौरी पूजन के अपनी सखियों के साथ आईं जनकनंदिनी सीता का राम के साथ प्रथम मिलन और चक्षु दर्शन होता है। लीला में सभी पात्रों ने अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय किया। समाजी और व्यासजी रामलीला के अमंचित प्रसंगों को दोहों और चौपाइयों के माध्यम से आगे बढा रहे थे। विश्वामित्र की भूमिका में संतोष त्रिपाठी, पंडों की भूमिका में बुद्घसिंह बुंदेला, ऋषि झा, प्रमोद स्वर्णकार, संतोष राठौर, अहिल्या कैलाश नगाइच, अन्य दुकानदारों की भूमिकायें पवन अग्रवाल, अमन सोनी, नीरज अग्रवाल सीते, सुशील दूरवार, संजय सिंघाल, अतुल शर्मा, हृतिक याज्ञिक, आकाश राठौर, सविनय झा, उज्ज्वल अग्रवाल, विश्वंभरदयाल झा, शिवकुमार गुप्ता, धु्रव सोनी, हिमांशु राठौर, अवधेश यादव आदि ने निभाईं। पर्दे के पीछे से मोहनदास नगाइच, रमेश तिवारी, पुरुषोत्तमदास रिछारिया, नरोत्तमदास स्वर्णकार, राजेन्द्र दुवे, मृदुल दांतरे, दीपक मिश्रा आदि सहयोग कर रहे थे।

 

 

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