• इंद्रतनय जयंत की धृष्टïता का दंड उसकी एक आंख फोड़ कर दिया राम ने

कोंच। रविवार की रात कोंच रामलीला के 166वें महोत्सव में जयंत उद्घार और ऋषि संवाद लीला का बड़ा ही सुंदर मंचन किया गया जिसमें सभी पात्रों ने अपनी अपनी भूमिका के साथ पूरा न्याय किया।

वनवास पर निकले दाशरथि राम, लक्ष्मण और जानकी चित्रकूट में अपनी पर्णकुटी में बैठे हैं तभी इंद्र का पुत्र जयंत कौये के वेश में आकर धृष्टïतावश सीताजी के पैर में चोंच मार देता है और राम कुपित होकर उसके ऊपर सरकंडे से बनाया वाण छोड़ देते हैं। जयंत तीनों लोकों में प्राणरक्षा की गुहार लगता दौड़ता फिरता है लेकिन कोई देवी देवता उसकी सहायता नहीं करते हैं, अंत में राम की ही शरण में वह प्राणरक्षा की भीख मांगता है और उसकी एक आंख फोड़ कर उसकी धृष्टïता का दंड देकर उसे प्राणदान दे देते हैं। इसके बाद राम विभिन्न ऋषियों-मुनियों के आश्रमों में जाकर उनसे ज्ञान चर्चा करते हैं। अत्रि आश्रम में माता अनुसुइया सीताजी को नारी धर्म की शिक्षा देकर अलौकिक वस्त्राभूषण प्रदान करती हैं। ऋषि अगस्त्य उन्हें दंडकवन में जाने का सुझाव देते हैं ताकि राक्षसों के त्रास से साधु समाज को निर्भय किया जा सके। यह प्रसंग बीती रात्रि कोंच की रामलीला की ऋषि संवाद लीला में मंचित किये गये। ऋषि अत्रि की भूमिका संतोष त्रिपाठी, जयंत सोनू नगाइच, नारद सुशील दूरवार मिरकू, अनुसुइया कैलाश नगाइच, अगस्त्य रामकिशोर पुरोहित, सुतीक्ष्ण कृष्णकांत वाजपेयी, इंद्र गालू मयंक, शंकर बंटे रावत, ब्रह्मïा रविकांत द्विवेदी आदि ने निभाई।

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