
उरई। भारतीय संस्कृति जहाँ नवरात्र में होने वाली देवी पूजा की धूमधाम के माध्यम से लड़कियों को वरदान मानने का संदेश देती है वहीं इस समाज में कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुरीति का भी प्रचलन हुआ जो विडंबना के साथ साथ लज्जित करने का भी कारण बना ।
माहिल तालाब पर सजे देवी पंडाल में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित हो चुके युवा चित्रकार रोहित विनायक की कन्या भ्रूण हत्या पर 15 मीटर की सामयिक पेन्टिंग इसी कारण जन मानस का ध्यानाकर्षित कर लोगों को झकझोर देने वाली रही । इस पेन्टिंग का शीर्षक सभ्य समाज का कैसा कन्या पूजन अपील की दृष्टि से बेहद असरदार नजर आया । रोहित विनायक ने कहा कि गरम लोहे पर हथोड़े की चोट अर्थवान होती है । दुर्गा पंडाल में इस पेन्टिंग को इसी नजरिये से देखा जाना चाहिये । नवरात्र की नवमी को जब कन्या भोज की होड़ पुण्यार्जन के लिए लगी है तब समाज को अपने किए का एहसास कराना उन्हें लगा कि बहुत सार्थक सिद्ध हो सकता है ।
नगर के प्रबुद्धजन भी रोहित विनायक की दलील से सहमत नजर आए । डीवी कालेज के पूर्व प्राचार्य डॉ आदित्य कुमार ने कहा कि नवरात्र के अवसर पर कन्या भ्रूण हत्या के मामले में ऐसे प्रयास से समाज में लड़कियों को हीं मानने वालों में गहरा अपराध बोध जगाएगा । चिंतक और विद्वान देवेन्द्र शुक्ल ने कहा कि रोहित विनायक का कला के माध्यम से मानसिकता परिवर्तन का प्रयास बेहद सटीक है । समाजसेवी महेश पाण्डेय ने भी रोहित विनायक की कोशिश को सराहा ।






Leave a comment