
डी जे न बजायेँ , शालीनता धारण करें , हिल मिल कर रहें
उरई । पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब के यौमे पैदायश के जश्न की तैयारियाँ क्लामेक्स पर है । इसके तहत जिक्र और मीलाद का सिलसिला जारी है । 20 नवम्बर को रात में शबे कद्र मनाया जायेगा और 21 नवम्बर को शानदार जुलूसे मोहम्मदी निकलेगा । इसी बीच तालीमी मिशन के प्रभारी और जिले के प्रमुख इस्लामिक विद्वान मौलाना शफ़ीक कादरी ने गरिमा के साथ खुशियाँ मनाने के लिए गाइड लाइन जारी की है ।
मौलाना कादरी के मुताबिक शालीनता का लिहाज हर वज़्म में जरूरी है । जुलूसे मुहम्मदी में शामिल हजरात पर लाज़िम है कि टोपी अवश्य धारण करें तथा अदब के मोड में रहें । डीजे का इस्तेमाल जुलूस में न करें चूंकि डीजे से बेतरतीब , बेहूदा तथा नाजेब शोर निकलता है जो तमाशे का अहसास कराता है जबकि शरीयत हमें गभीरता का सबक देती है , इसलिये हम पर अनिवार्य है कि हम पैगंबरे इस्लाम की मीलाद में उनके द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों का पालन करें । मालूम रहे कि पैगंबरे इस्लाम तमाम तमाशों और मेले –ठेलों पर अंकुश लगाया था ।
मौलाना कादरी ने कहा कि लंगर व फातिहा के तबर्रुक वितरण में विशेष शालीनता बरतें ताकि खाने पीने की चींजों का अहतराम बाकी रहे और अपनी खुशियों में नादिर गरीब , मुफ़लिस , मजलूम व मुसीबतजदा लोगों को जरूर शामिल करें । पर्दे का अहतराम व अहतिमाम करें । फिजूल की चहलक़दमी से बचें तथा हर – हर कदम पर पैगंबरे इस्लाम की शिक्षाओं को दृष्टिगत रखें । पड़ोसी का ख्याल रखें अगर कोई कोई नाजायज तौर पर बदअमनी पर आमादा हो तो सब्र इत्मीनान और पैगंबरे इस्लाम के मिजाज के मुताबिक नरमी का सुलूक पेश करें । इंशाअल्लाह इन एहतियातों को बरतने का बेहतरीन सिला रब ताला की तरफ से अदा होगा ।






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