उरई। समाजवादी पार्टी की जिस तरह से प्रदेश में इस बार लहर चलती दिखाई दे रही थी उसकी वजह से उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के पहले भाजपा के लिए सरकार रिपीट करना टेढ़ी खीर लग रहा था। जालौन जिला और खासतौर से उरई सीट पर भाजपा के लिए हालात और अधिक चुनौतीपूर्ण नजर आ रहे थे लेकिन सारी आशंकायें निराधार साबित हुई। मुसलमानों के पहली बार एक पार्टी के पक्ष में इस कदर ध्रुवीकरण से सपा का जो बूम था उसमें और कुछ ठोस नहीं था। नतीजतन पूरे प्रदेश में भाजपा को फिर से भारी बहुमत मिला और उरई सीट पर गौरी शंकर वर्मा भी दूसरी बार विधायक निर्वाचित हो गये।
गौरी शंकर वर्मा ने कैसे तोड़ा मिथक-
कहा यह जा रहा था कि जब भी गौरी शंकर सपा के उम्मीदवार दयाशंकर वर्मा के मुकाबिल रहे हैं उन्हें पराजय का मुंह देखना पड़ा है। 2017 में पहली बार उन्हें सदन में प्रवेश का अवसर तब मिल पाया था जब दयाशंकर उनके सामने मैदान में नहीं थे। इस बार दयाशंकर वर्मा फिर मैदान में है जिससे उनके ग्रहों की चाल बिगड़ना लाजिमी है।
पर वहम के ऐसे मिथक को तोड़ने का बीड़ा उठाये प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा ने उरई को लेकर भी उक्त मिथक तोड़ दिया। गौरी शंकर वर्मा ने उरई में वैसा ही मिथक झुठलाया जैसा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा की यात्रा करके झुठलाया था। अभी तक कहा यह जा रहा था कि जो भी मुख्यमंत्री कुर्सी पर रहते हुए नोएडा की यात्रा कर लेता है उसे अंततोगत्वा कुर्सी गंवानी पड़ती है। इसलिए हर मुख्यमंत्री ने अघोषित तौर पर अपने लिए नोएडा के दौरे को वर्जित मान लिया था। इसके विपरीत योगी ने ऐलानियां सत्ता के सिंहासन पर रहते हुए नोएडा के दौरे का जोखिम उठाया और इसके बावजूद चुनाव में फिर से जनादेश हासिल करके ऐसी वर्जना को अंधविश्वास साबित कर दिया।
इसी तर्ज पर गौरी शंकर वर्मा ने भी इस बार दयाशंकर वर्मा के मुकाबिल होते हुए भी दुबारा मतदाताओं का विश्वास हासिल करने में सफलता प्राप्त करके अपने से जुड़े बहम से पार पाकर दिखा दिया। इसमंे पार्टी की सफलता के साथ-साथ गौरी शंकर वर्मा का अपना भी योगदान कम नहीं है। अगर यह कहावत सही है कि सेवा करने वाला ही मेवा खाता है तो गौरी शंकर वर्मा ने पहले कार्यकाल में इस कसौटी पर अपने को बेहद खरा साबित किया है।
सेवा से पायी मेवा-
उन्होंने उरई विधानसभा क्षेत्र में सड़क से लेकर विकास की हर जरूरत पूरी कराने के लिए पहले के किसी भी जनप्रतिनिधि की तुलना में सबसे ज्यादा कारगर व्यक्तिगत प्रयास किये। साथ ही साथ पीड़ित आम लोगों की संवेदनापूर्वक सुनवाई करने और राहत दिलाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी।
पांचों साल लाकडाउन को छोड़कर वह प्रतिदिन नियमित रूप से अपने आवास पर लोगों से मिलते रहे और हर व्यक्ति की मदद करते रहे। इतना ही नहीं हर रोज वे किसी न किसी इलाके में बाहर भी जाते थे और जगह-जगह स्थापित किये गये अपने संपर्क केन्द्रों पर लोगों से भेंट करते थे। यह क्रम चुनाव बाद उन्होंने फिर शुरू कर दिया है।
कोरोना काल में उनके द्वारा की गयी जनसेवा की अलग ही चर्चा रही। उन्होंने अभावग्रस्त लोगों को भोजन, सेनिटाइजर, मास्क, दवा व अन्य जरूरत की सामग्री उपलब्ध कराने में बढ़ चढ़कर योगदान किया। यहां तक कि वे इसके लिए व्यक्तिगत खर्चा करने में भी पीेछे नहीं रहे।
योगी के कृपापात्र, स्वतंत्र देव के चहेते-
अपने इन्हीं गुणों की वजह से वे प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के विशेष चहेते बन गये हैं। कोरी समाज आज जिस तरह से भाजपा के लिए समर्पित है उससे पार्टी में इस समाज का विशेष स्थान बन चुका है। इस समाज के प्रतिनिधि के रूप में गौरी शंकर वर्मा अभी एक दशक तक और पार्टी को अपनी सेवायें बेहतर तरीके से दे सकते हैं। इसलिए पार्टी उन्हें भविष्य निधि के बतौर तैयार करने के मूड में नजर आती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उन पर मेहरबान हैं। उरई क्षेत्र के लोगों की निगाहें 25 मार्च को होने जा रहे योगी की नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हैं जिसमें उन्हें स्वतंत्र देव सिंह की पैरवी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नजरें इनायत से गौरी शंकर को मंत्रिपद से नवाजे जाने की पूरी उम्मीद बंधी हुई है।  

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