उरई। नगर पालिका परिषद उरई में कथित फर्जी एवं अनियमित कुटेशन आधारित भुगतानों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नया मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। एक दिन पहले कुछ सभासदों द्वारा अधिशासी अधिकारी (ईओ) पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाने के बाद गुरुवार को लगभग 16 सभासदों एवं उनके प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

सभासदों ने जिलाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में कहा कि नगर पालिका में कराए गए कुछ कुटेशन कार्यों के भुगतान, उनकी प्रक्रिया और अभिलेखों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका आरोप है कि बीते लगभग दो वर्षों से नगर पालिका के विकास कार्य विवादों के कारण प्रभावित हो रहे हैं। शिकायत में यह भी कहा गया कि कुछ लोग विवादित कार्यों के भुगतान को लेकर लगातार नगर पालिका प्रशासन पर दबाव बना रहे हैं, जबकि संबंधित कार्यों की गुणवत्ता, भुगतान प्रक्रिया और अभिलेखों की वैधता को लेकर अनेक शंकाएं बनी हुई हैं।

सभासदों ने मांग की कि विवादित कार्यों से संबंधित निविदा एवं कुटेशन प्रक्रिया, माप पुस्तिका (एमबी), प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृतियों, भुगतान अभिलेखों तथा संबंधित फाइलों की विस्तृत और निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि इस विवाद के कारण नगर के विकास कार्य बाधित हो रहे हैं और जनता के बीच भ्रम एवं असंतोष की स्थिति पैदा हो रही है।

शिकायतकर्ताओं ने अपने पत्र में उस कथित वायरल पत्र का भी उल्लेख किया है, जिसमें लगभग 16 सभासदों के नाम से कुटेशन भुगतान की मांग किए जाने का दावा किया गया है। सभासदों का कहना है कि उक्त पत्र की सत्यता और उससे जुड़े तथ्यों की भी जांच होना आवश्यक है, क्योंकि यही पूरा विवाद का मुख्य बिंदु बन गया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने जांच की जिम्मेदारी एसडीएम जालौन रिंकू सिंह राही को सौंपते हुए उन्हें जांच अधिकारी नामित किया है। अब सभी पक्षों के बयान और अभिलेखों की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

जिलाधिकारी से मुलाकात करने वालों में नामित सभासद अनुज नाग के अलावा विभिन्न वार्डों के सभासद एवं उनके प्रतिनिधि शामिल रहे। सभी ने हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन देकर निष्पक्ष जांच की मांग की और कहा कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए ताकि नगर पालिका में चल रहे विवाद पर विराम लग सके।

Leave a comment