केपी सिंह बोले- आस्था के साथ धैर्य और अनुशासन ने पूरी कराई लंबी पदयात्रा, अरविंद द्विवेदी ने बताया दृढ़ इच्छाशक्ति की मिसाल
कुठौन्दा-उरई। रास्ते बदलते रहे, मौसम ने परीक्षा ली और कदम थकते रहे, लेकिन संकल्प नहीं डिगा। करीब 2800 किलोमीटर की पदयात्रा पूरी कर सिद्धपीठ हनुमान मंदिर कुठौन्दा धाम लौटे महंत श्री श्री 1008 रामेश्वर दास जी महाराज का सोमवार को प्राचीन रामजानकी परिसर में भव्य सम्मान किया गया। जयकारों से गूंजते परिसर में श्रद्धालुओं और क्षेत्रीय लोगों ने महंत जी का स्वागत किया। कार्यक्रम में उनकी यात्रा को आस्था, तपस्या और दृढ़ इच्छाशक्ति की मिसाल बताया गया। समारोह में वरिष्ठ पत्रकार अरविंद द्विवेदी ने कहा कि संकल्प यदि दृढ़ निश्चय के साथ लिया जाए तो उसे पूरा होने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा कि 2800 किलोमीटर की पदयात्रा केवल पैरों से तय की गई दूरी नहीं, बल्कि विश्वास और इच्छाशक्ति की परीक्षा थी। कदम थक सकते हैं, शरीर थक सकता है, लेकिन मजबूत संकल्प इंसान को मंजिल तक पहुंचाकर ही दम लेता है। वरिष्ठ पत्रकार केपी सिंह ने कहा कि इतनी लंबी पदयात्रा पूरी करना सामान्य उपलब्धि नहीं है। इसके लिए आस्था के साथ धैर्य, अनुशासन और अदम्य इच्छाशक्ति की जरूरत होती है। महंत जी ने हर मुश्किल के बीच अपने संकल्प को आगे बढ़ाया। उनकी यात्रा क्षेत्र के लोगों के लिए प्रेरणा और गर्व का विषय है। उन्होंने कहा, “संकल्प के आगे हर दूरी छोटी हो जाती है।” मंच से दीपक अग्निहोत्री और ओमप्रकाश राठौर ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम संयोजक एवं वरिष्ठ पत्रकार रामनरेश द्विवेदी कुठौन्दा ने महंत जी का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी तपस्या से कुठौन्दा धाम की प्रतिष्ठा और बढ़ी है। उन्होंने आयोजन में पहुंचे सभी अतिथियों का आभार जताया। कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद जिलाध्यक्ष गुरु प्रसाद शर्मा, क्षेत्रीय विधायक मूलचंद निरंजन, ब्लाक प्रमुख माधौगढ़ मोहित दोहरे सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे। इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार एवं कलमकार केपी सिंह, दीपक अग्निहोत्री, अरविंद द्विवेदी, शालिक राम पांडेय, राम आसरे त्रिवेदी, विष्णु बल्लभ चंसौलिया, विनोद कुमार मिश्रा, सुधीर पाठक, सतीश द्विवेदी, राममनोहर यादव, सलमान खान, पुष्पेंद्र सिंह, साहब सिंह, अंजनी कुमार सोनी और अनुज शर्मा समेत अन्य लोगों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में महेश चंद्र पाण्डेय, चित्रांगत पाण्डेय, प्रशांत अवस्थी, अमित शर्मा, राघवेंद्र दोहौलिया, आकाश, दुर्गेश लक्ष्मीकांत, अनुज, मानबेन्द्र और सुदीप शर्मा, विकास आदि ने सहयोग किया। संरक्षक शालिग्राम पांडेय के मार्गदर्शन में कार्यक्रम संपन्न हुआ। प्रधान प्रतिनिधि राघवेंद्र दोहौलिया ने अतिथियों का माल्यार्पण कर स्मृति चिह्न भेंट किए।जयकारों के बीच जब 2800 किलोमीटर की तपस्या पूरी कर लौटे महंत के कदमों को सम्मान मिला तो हर चेहरा श्रद्धा से खिल उठा। यह सम्मान एक संत का ही नहीं, बल्कि उस संकल्प का था, जिसने लंबी दूरी को भी मंजिल तक पहुंचने का रास्ता बना दिया। रामनरेश द्विवेदी नें आये अतिथियों का आभार व्यक्त किया।






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