जालौन-उरई । दावते इस्लामी इंडिया की ओर से सोमवार को हुजूर गौस पाक (रजि) की बारगाह-ए-अकदस में खिराज-ए-अकीदत (श्रद्धांजलि) पेश की गई। सुबह से ही कुरान ख्वानी और फातेहा ख्वानी का दौर शुरू हुआ। विभिन्न जगहों पर जिक्र-ए-गौस-ए-आजम की महफिल भी सजी। इस दौरान नगर के विभिन्न मार्गों से होकर अकीदतमंदों द्वारा जुलूस भी निकाला गया।
ग्यारहवीं शरीफ के मौके पर जुलूस का आगाज दावते इस्लामी इंडिया की ओर से तिलावते कुरआन पाक से हुआ। जुलूस के दौरान आमिर हुसैन अत्तारी ने कहा कि गौस-ए-आजम पैगंबरे इस्लाम के शहजादों में से हैं। अल्लाह के वली गौस-ए-आजम हसनी और हुसैनी सैयद हैं। अल्लाह ने आपको गौसियत और कुतबियत (वलियों का सरदार) का मुकाम दिया है।
यह इमाम मेंहदी के आगमन तक बरकरार रखेगा। आपकी महान करामात है कि खुद ही शरीअत-ए-इस्लामिया पर चलते रहे और दूसरों को भी चलने का पैगाम दिया और इस्लाम को जिंदगी बख्शी। शहर काजी मौलाना साबिर ने कहा कि रसूलों की जमात में पैगंबर मुहम्मद साहब के सिवा कोई रसूल ए आजम न हुआ, उसी तरह औलिया के जमात में गौस तो हुए मगर हजरत शेख अब्दुल कादिर जीलानी के सिवा कोई गौसे ए आजम न हुआ। जुलूस चिमन दुबे से तकिया मैदान, नारोभास्कर, बाजार बैठगंज होते हुए पुनः तकिया मैदान पर जाकर समाप्त हुआ। इस दौरान या गौस अल मदद की सदाएं गूंजती रहीं। वहीं, घरों पर कुरान ख्वानी व फातेहा ख्वानी चलती रहीं। इस मौके पर शहर काजी मौलाना साबिर, हाफिज रफीक, हाफिज सईद, हाफिज साबिर, हाफिज सगीर, हाफिज शाहनवाज अत्तारी, हाफिज साकिर, रजा बरकाती, जफर अत्तारी, निजाम अत्तारी, जुनैद अत्तारी, अब्दुल रशीद अत्तारी शान अत्तारी, मेहताब, इमरान अंसारी, जर्रार क़ादरी, कफील कुरैशी आदि मौजूद रहे |






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