जालौन देवी माता मंदिर पर हर सोमवार को भक्तों का लगता ताँता

उरई ।जिला मुख्यालय से 65 किमी दूर यमुना नदी के किनारे घने जंगल में स्थित जालौन माता मंदिर लोगों की अटूट आस्था का केंद्र है। मंदिर एक ऊंचे टीले पर बना हुआ है। नवरात्रि में यहां मध्य प्रदेश, इटावा,औरैया,जालौन व झांसी सहित कई जिलों के श्रद्धालु जवारे लेकर आते हैं। अन्य दिनों में भी भक्तों की भीड़ लगी रहती है। यहां जो भी भक्त मन्नत मांगता है उसकी मन्नत अवश्य पूरी होती है। माताएं बहनें हल्दी से हाथों के निशान मंदिर में बनाकर मन्नत मांगती हैं।

मंदिर का इतिहास काफी पुराना है मान्यता है कि महाभारत काल में जब पांडव अज्ञातवास में थे तो उन्होंने ही यहां माता जयंती की स्थापना की थी और यहां पर पूरा समय बिताया था। जो अब जालौन वाली माता के नाम से प्रसिद्ध है। मंदिर के पुजारी पं मदन शुक्ला ने हमारे संवाददता को बताया कि मां का मुख पूर्व दिशा की ओर है जिससे सूर्य की पहली किरण मां के चरणों को स्पर्श करती है। साथ ही ब्रह्म मुहुर्त में मां के चरणों में जल अर्पित हो जाता है जिसका रहस्य कोई सुलझा नहीं सका है।

मंदिर के प्रति कई जिलों के लोगों में अटूट आस्था है। नवरात्र में यहां भव्य मेले का आयोजन होता है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु रोजाना माता के दर्शन करने के लिए आते हैं। यहां पर लोग कन्या भोज का आयोजन भी करते हैं। संतान प्राप्ति के बाद माता बहनें छठी भोज का आयोजन करती हैं और बच्चों को मुंडन कराने भी आती हैं। नवरात्रि में भागवत,कथा व भंडारे का आयोजन पूरे नौ दिनों तक किया जाता है

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