उरई।
एक ओर लोगों को सरकारी अस्पतालों में कारगर चिकित्सा सुविधायें देने के दावे हो रहे हैं दूसरी ओर हकीकत कुछ और कह रही है। आश्चर्यजनक ढंग से मेडिकल काॅलेज अस्पताल और जिला अस्पताल दोनों जगह की पैथलोजी एक साथ लड़खड़ा गयी है और गरीब मरीजों को निजी सेंटरों पर धकेला जा रहा है जहां इन जांचों में मनमाने शुल्क की वसूली होती है।
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक आये दिन सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था दुरूस्त रखने के बारे में दहाड़ते रहते हैं जबकि यथार्थ में इसका मूल्य ढकोसले से अधिक नजर नहीं आता। करोड़ों रूपये से सरकारी अस्पतालों में स्थापित करायी गयी जांच मशीनों का आये दिन ठप्प होना इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। पिछले तीन दिन से जिला अस्पताल में पैथलोजिकल टेस्ट की मशीनें खराब होने से लोगों को बाहर जाकर सेंटरों पर जांच करानी पड़ रही है जिसमें डाक्टरों के कमीशन की खातिर उनका मनमाना शोषण होता है। मेडिकल काॅलेज अस्पताल में भी आज ब्लड टेस्ट में असमर्थता जाहिर की जा रही थी। मरीजों से कहा जा रहा था कि मशीन खराब है। प्राइवेट सेंटर से जांच करा लो।
सरकारी अस्पताल कई तरह की धांधलियों के अड्डे साबित हो रहे हैं। उदाहरण के तौर पर स्वास्थ्य मंत्री मुह जुबानी में भले ही कितना भी यह कहते रहें कि विशेषज्ञ डाॅक्टर प्राथमिकता के आधार पर जिला अस्पताल में तैनात किये जाने चाहिये लेकिन स्थिति यह है कि डाॅक्टरों की पोस्टिंग में लेनदेन का खेल चलने के कारण विशेषज्ञ डाॅक्टर पैसे न देने की वजह से सुदूर सीएचसी पीएचसी में फेंके जा रहे है जिससे जिला अस्पताल की व्यवस्थायें शो पीस साबित हो रहीं हैं। जनसंघर्ष मोर्चा के नेता अशोक गुप्ता महाबली ने कहा कि अगर स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बंद नहीं होती तो धरना प्रदर्शन का आवाहन किया जायेगा।

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