लखनऊ। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश (प्राथमिक संवर्ग) ने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शैक्षणिक घंटों को आरटीई-2009 के अनुसार निर्धारित करते हुए एक स्थायी समयावधि लागू करने की मांग उठाई है।

प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने कहा कि बाल मनोविज्ञान के अनुसार विद्यालय का समय बच्चों की आयु, मानसिक स्थिति और शारीरिक विकास को ध्यान में रखकर तय किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि बच्चों की मानसिक ऊर्जा सीमित होती है, ऐसे में बहुत लंबे समय तक स्कूल में रहना उनके लिए तनावपूर्ण साबित हो सकता है। इसलिए संतुलित और वैज्ञानिक समय सारिणी बेहद आवश्यक है।

प्रदेश महामंत्री प्रदीप तिवारी ने बताया कि नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE-2009) के तहत विद्यालयों के लिए कार्यदिवस और शिक्षण घंटों की संख्या पहले से निर्धारित है। इसके अनुसार कक्षा 1 से 5 तक के लिए 200 कार्यदिवस और 800 घंटे तथा कक्षा 6 से 8 तक के लिए 220 कार्यदिवस और 1000 घंटे निर्धारित हैं।

संगठन ने सुझाव दिया कि ग्रीष्मकाल में विद्यालय का समय प्रातः 7:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक (साढ़े चार घंटे) और शीतकाल में पांच घंटे रखा जाए। इससे न केवल बच्चों पर अनावश्यक दबाव कम होगा, बल्कि बार-बार समय परिवर्तन की आवश्यकता भी समाप्त हो जाएगी।

प्रदेश मीडिया प्रभारी बृजेश श्रीवास्तव ने बताया कि इस संबंध में मांगपत्र प्रमुख सचिव, बेसिक शिक्षा विभाग और महानिदेशक स्कूल शिक्षा को भेजा गया है।

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