दो चिताओं के बाद बची खामोशी… और फिर सहारा बनकर पहुंची पुलिस



रामपुरा -उरई । ग्राम मिर्जापुरा जागीर में 20 अप्रैल की वह शाम आज भी लोगों के ज़ेहन में सिहरन पैदा कर देती है। जमीन के एक टुकड़े को लेकर शुरू हुआ विवाद ऐसा भड़का कि देखते ही देखते दो सगे भाइयों की जान चली गई। घर के आंगन में जहां कभी हंसी गूंजती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा है।

इस घटना के बाद हालात और भी त्रासद हो गए। परिवार के बुजुर्ग पिता और एक अन्य भाई जेल भेज दिए गए। घर में बचीं सिर्फ महिलाएं और मासूम बच्चे—जिनकी आंखों में डर, भूख और अनिश्चित भविष्य का साया साफ दिखाई देता है। चूल्हा ठंडा पड़ चुका था और रोजमर्रा की जरूरतें भी किसी पहाड़ जैसी लगने लगी थीं।

इसी बीच 24 अप्रैल की सुबह एक उम्मीद लेकर आई। थाना प्रभारी निरीक्षक रजत कुमार सिंह पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे। वर्दी में आए इन लोगों को देखकर पहले तो बच्चे सहम गए, लेकिन जब वही हाथ उनके सिर पर स्नेह से फिरा और उनके सामने राशन व राहत सामग्री रखी गई, तो माहौल बदलने लगा।

रजत कुमार सिंह ने परिवार के पास बैठकर उनका हाल जाना, दुख साझा किया और भरोसा दिलाया कि वे अकेले नहीं हैं। महिलाओं की आंखों से आंसू बह निकले—इस बार दर्द के नहीं, बल्कि इस बात के कि मुश्किल वक्त में कोई उनके साथ खड़ा है।

गांव के लोग भी इस दृश्य के गवाह बने। जहां कुछ दिन पहले गुस्सा और मातम था, वहीं अब संवेदना और सहारे की एक नई कहानी लिखी जा रही थी।

पुलिस की यह पहल सिर्फ राहत सामग्री देने तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने यह संदेश भी दिया कि वर्दी सिर्फ कानून का प्रतीक नहीं, बल्कि इंसानियत का भी चेहरा हो सकती है।

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