हिंदी पत्रकारिता दिवस पर मंथन: सोशल मीडिया के प्रभाव और पत्रकारिता के नए आयामों पर हुई चर्चा

उरई । हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ, जालौन इकाई के तत्वावधान में एक भव्य एवं विचारोत्तेजक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हिंदी पत्रकारिता के वर्तमान स्वरूप, सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव, डिजिटल युग की चुनौतियों तथा पत्रकारिता के बदलते प्रतिमानों पर व्यापक चर्चा की गई।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला (पूर्व पुलिस महानिदेशक एवं सुशासन समिति भाजपा के अध्यक्ष), अध्यक्षता कर रहे डॉ. घनश्याम अनुरागी (पूर्व सांसद एवं जिला पंचायत अध्यक्ष), विशिष्ट अतिथि डॉ. प्रवीण सिंह जादौन (निदेशक, राज्य निर्माण सहकारी समिति उत्तर प्रदेश), बृजकिशोर गुप्ता (उपसभापति, पीसीयू) तथा मुख्य विकास अधिकारी कुमुदेन्द्र कलाकर सिंह द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।

उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के जिला अध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक श्रीकांत शर्मा ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि हिंदी पत्रकारिता आज संक्रमण के दौर से गुजर रही है। तकनीक ने जहां नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं, वहीं सत्य, विश्वसनीयता और नैतिकता की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। उन्होंने पत्रकारों से जनहित और सामाजिक सरोकारों को केंद्र में रखकर कार्य करने का आह्वान किया।

मुख्य अतिथि डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला ने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अपुष्ट और भ्रामक सूचनाओं का तेजी से प्रसार समाज में भ्रम और अव्यवस्था पैदा कर सकता है। उन्होंने पत्रकारों से तथ्यपरक, उत्तरदायी और राष्ट्रहितकारी पत्रकारिता को अपनाने का आग्रह किया।

डॉ. घनश्याम अनुरागी ने हिंदी पत्रकारिता की ऐतिहासिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल क्रांति और इंटरनेट ने हिंदी पत्रकारिता को वैश्विक पहचान दिलाई है। आज हिंदी करोड़ों लोगों की अभिव्यक्ति और चेतना का सशक्त माध्यम बन चुकी है।

बृजकिशोर गुप्ता ने कहा कि हिंदी समाचार पत्र, वेबसाइट और डिजिटल न्यूज पोर्टल अब विश्व के कोने-कोने तक अपनी पहुंच बना चुके हैं और हिंदी पत्रकारिता वैश्विक संवाद की महत्वपूर्ण धुरी बन रही है।

जिला बार संघ उरई के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता ऋषि पटेल ने हिंदी के प्रथम समाचार पत्र उदन्त मार्तण्ड का स्मरण करते हुए बताया कि इसका प्रथम प्रकाशन 30 मई 1826 को हुआ था। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक ने हिंदी पत्रकारिता को नई ऊर्जा और व्यापक प्रभाव प्रदान किया है।

डॉ. प्रवीण सिंह जादौन ने नागरिक पत्रकारिता की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज सामान्य नागरिक भी सोशल मीडिया और डिजिटल मंचों के माध्यम से सूचना प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पूर्व आईआरएस अधिकारी शंभूदयाल ने हिंदी भाषा की बढ़ती लोकप्रियता पर विचार रखे, जबकि मुख्य विकास अधिकारी कुमुदेन्द्र कलाकर सिंह ने पत्रकारिता में तकनीकी नवाचारों और नई संभावनाओं पर चर्चा की।

उपजा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार दीपक अग्निहोत्री ने कहा कि पत्रकारिता केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि समाज के प्रति नैतिक उत्तरदायित्व है। उन्होंने पत्रकारों से अपनी लेखनी की “पात्रता, पवित्रता और प्रखरता” बनाए रखने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में एकता ने हिंदी पत्रकारिता पर आधारित भावपूर्ण काव्य प्रस्तुति देकर उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया। इस दौरान वरिष्ठ नेता सुरेश निरंजन, राजवीर सिंह जादौन, विष्णु कुमार चतुर्वेदी, हरेन्द्र विक्रम सिंह सहित अनेक वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए।

संगोष्ठी में वरिष्ठ पत्रकार अरविंद द्विवेदी, रमाकांत शर्मा, सुनील शर्मा, सोबरन सिंह, सोनू निरंजन, कमलकांत दुबे, ओमप्रकाश मामा, नीरज निगम, डॉ. आईपी सिंह, वीरेंद्र सिंह चौहान, सत्येंद्र राजावत, धर्मेंद्र राजपूत, रामकुमार जादौन, विवेक समाधियां, पवन यादव, धनंजय त्रिवेदी सहित बड़ी संख्या में पत्रकार एवं मीडिया कर्मी उपस्थित रहे।

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