पोषण समिति की बैठक में योजनाओं की समीक्षा, आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों का शत-प्रतिशत सत्यापन और नियमित स्वास्थ्य जांच कराने पर जोर

उरई। जनपद में कुपोषण से निपटने के लिए प्रशासन ने आंगनबाड़ी केंद्रों की निगरानी और पोषण योजनाओं के क्रियान्वयन पर सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी समीर ने कहा कि बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के पोषण स्तर में सुधार प्रशासन की प्राथमिकता है। पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का पूरा लाभ पहुंचाने के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से काम करें।

मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला पोषण समिति एवं कन्वर्जेंस विभागों की मासिक समीक्षा बैठक में डीएम ने पोषण ट्रैकर, टेक होम राशन (टीएचआर) वितरण, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के गृह भ्रमण और कुपोषित बच्चों की पहचान एवं उपचार की प्रगति परखी। उन्होंने निर्देश दिए कि पोषण ट्रैकर पर सभी लाभार्थियों का शत-प्रतिशत सत्यापन और समय से डेटा फीडिंग सुनिश्चित की जाए।

डीएम ने कहा कि छह वर्ष तक के बच्चों का नियमित वजन और लंबाई मापने के साथ गर्भवती एवं धात्री महिलाओं की भी लगातार निगरानी की जाए। गंभीर कुपोषित (एसएएम) और मध्यम कुपोषित (एमएएम) बच्चों को चिह्नित कर उनकी नियमित स्वास्थ्य जांच, उपचार और फॉलोअप कराया जाए। अभिभावकों को भी संतुलित एवं पौष्टिक आहार के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया।

जिन परियोजनाओं में योजनाओं की प्रगति कम है, वहां विशेष अभियान चलाकर सुधार लाने और नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए। डीएम ने आंगनबाड़ी केंद्रों पर निर्धारित मानकों के अनुसार पोषाहार उपलब्ध कराने तथा टीएचआर का समय से गुणवत्तापूर्ण वितरण सुनिश्चित करने को कहा। वितरण में देरी या किसी तरह की बाधा मिलने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश भी दिए।

बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एचएन प्रसाद, परियोजना निदेशक अखिलेश तिवारी, वरिष्ठ कोषाधिकारी आनंद सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी राम अयोध्या प्रसाद, जिला कार्यक्रम अधिकारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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