कोंच-उरई। भारतीय संविधान के निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान देकर समाज के दबे कुचलों के हितों व अधिकारों को उसमें 06orai07सुरक्षित करने के लिये याद किये जाने वाले बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर को आज उनके महापरिनिर्वाण दिवस पर उनके अनुयायियों ने याद करते हुये उन्हें भावपूरित श्रद्धासुमन समर्पित किये।
दुनिया के सबसे बड़े और बहुआयामी सामाजिक तानेबाने में दबे कुचलों को उनके अधिकारों और हितों से लैस करने का काम कर गये भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर को उनके महापरिनिर्वाण दिवस पर यहां गांधीनगर इलाके में उनके अनुयायियों ने श्रद्धापूर्वक याद किया और उन्हें आधुनिक भारत का निर्माता बताते हुये उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किये। दीनदयाल अहिरवार के हाते में शहर काजी बशीरउद्दीन की अध्यक्षता एवं बसपा नेता जितेन्द्र राय अहिरवार के मुख्य आतिथ्य में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि उस समय जब भारतीय समाज में दलितों को हेय दृष्टि से देखकर उनके साथ दोयम दर्जे का वर्ताव किया जाता था, स्वयं डॉ- अंबेडकर को भी इन्हीं सामाजिक विद्रूपताओं की कष्टप्रद मनःस्थिति के दौर से गुजरना पड़ा था। जब उन्हें आजादी के बाद संविधान निर्माण ड्राफ्टिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया तो उन्होंने उपेक्षित तबके के उत्थान और उन्हें बराबरी का हक दिलाने के प्रावधानों का उसमें समावेश किया जिसके बदौलत आज के भारत की तस्वीर बन सकी है। वे एक महान दार्शनिक, दूरदृष्टा और समतामूलक समाज के पक्षधर थे जिसके चलते आज वे समाज के सभी तबकों में समान रूप से आदर से देखे जाते हैं। इस दौरान राम मास्टर, ओमप्रकाश, विजय वर्मा, मंगली मिस्त्री, मोहनलाल, ठाकुरदास, किसुनप्रसाद, मुन्ना परदेसी, रमाकांत, राजाबाबू, प्रदीप, दीपू, अवधेश चैधरी, चंद्रपाल, डॉ. लक्ष्मीनारायण, देशराज, नदीम, संतोष, रामप्रकाश, रियाज अहमद, महेन्द्रप्रताप, सुरेन्द्र, आनंद चैधरी, रामसेवक चैधरी, उदय चैधरी, राहुल, विवेक अहिरवार आदि मौजूद रहे।

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