अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ एवं बीबीएयू के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय मीडिया कार्यशाला का शुभारम्भ
लखनऊ, 25 जुलाई। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (एबीआरएसएम) एवं बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय मीडिया कार्यशाला का शुभारम्भ आज प्रेरणादायी उद्घाटन सत्र के साथ हुआ। इस कार्यशाला में देशभर से आए शिक्षक, मीडिया समन्वयक एवं शिक्षाविद शिक्षा और राष्ट्र निर्माण में मीडिया की परिवर्तनकारी भूमिका पर मंथन करने के लिए एकत्र हुए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार एवं दूरदर्शन समाचार के पूर्व संपादक श्री अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि शिक्षक समाज का सबसे प्रभावशाली वर्ग है, जिसके पास राष्ट्र के भविष्य को दिशा देने की अद्वितीय क्षमता है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को “विजनरी जेनरेशन (Visionary Generation)” के रूप में विकसित करना समय की आवश्यकता है, जो भारत को वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर करे। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे “कक्षा से बाहर और परंपरागत सोच से आगे बढ़कर” विचार करें, क्योंकि सार्थक शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों और पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों तक सीमित नहीं है।
हाल ही में भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की उपलब्धियों तथा स्काईरूट एयरोस्पेस की सफलता का उल्लेख करते हुए श्री श्रीवास्तव ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने, नवाचार करने और राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक योगदान देने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं की आकांक्षाएँ वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार, उद्यमिता और राष्ट्रीय विकास से जुड़ी होनी चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. के. मित्तल ने कहा कि शिक्षकों का दायित्व केवल ज्ञान प्रदान करना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में संस्कार, नैतिक मूल्य तथा उद्यमशीलता का विकास करना भी है। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं में नवाचार, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता का विकास किया जाए तो भारत निर्धारित समय से पहले ही विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।
इससे पूर्व कार्यशाला में उपस्थित प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. नारायण लाल गुप्ता ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला तथा शिक्षा एवं समाज में मीडिया की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का आधार नैतिकता होना चाहिए और शिक्षक अपने आचरण, चरित्र एवं राष्ट्रीय दायित्व बोध के माध्यम से नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करें। उन्होंने बताया कि इस कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को आधुनिक मीडिया कौशल से सुसज्जित करना है, ताकि वे शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक कार्यों को प्रभावी ढंग से समाज तक पहुँचा सकें।
महासंघ की राष्ट्रीय महामंत्री प्रो. गीता भट्ट ने भी अपने संबोधन में शिक्षा क्षेत्र को सशक्त बनाने तथा समाज में सकारात्मक संवाद स्थापित करने के लिए उत्तरदायी एवं प्रभावी संचार की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम में महासंघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री महेंद्र कपूर, उप राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री जी. लक्ष्मण, वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री मनंदर कुमार सहित विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से आए प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन प्रो. गोविंद पाण्डेय ने किया।
कार्यशाला के प्रथम दिवस में रील निर्माण, समाचार लेखन एवं रिपोर्टिंग, प्रभावी मीडिया संचार तथा अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के मीडिया प्रकोष्ठ के उद्देश्य एवं कार्यप्रणाली विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। विशेषज्ञों ने डिजिटल एवं सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग के माध्यम से शैक्षिक जागरूकता बढ़ाने तथा संगठनात्मक संवाद को सुदृढ़ बनाने के व्यावहारिक सुझाव साझा किए।





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