उरई। करीब 20 वर्ष पुराने रंगदारी, घर में घुसकर मारपीट, तोड़फोड़ और जान से मारने की धमकी के चर्चित मामले में विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र), जालौन स्थित उरई की अदालत ने दो अभियुक्तों को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराते हुए कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई। सजा सुनाए जाने के बाद दोनों दोषियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

अभियोजन के अनुसार, थाना कोतवाली कोंच में वर्ष 2007 में दर्ज मुकदमा संख्या 90/2007 में वादिनी ने आरोप लगाया था कि मनोज, अशोक कुमार और सुनील उसके घर में घुस आए, ₹2.50 लाख की रंगदारी मांगी, तमंचा दिखाकर जान से मारने की धमकी दी, मारपीट की तथा घर में तोड़फोड़ कर विद्युत वायरिंग भी क्षतिग्रस्त कर दी। पुलिस विवेचना के बाद मनोज और अशोक कुमार के विरुद्ध आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। बाद में न्यायालय ने धारा 319 दंड प्रक्रिया संहिता (तत्कालीन प्रावधान) के तहत सुनील को भी विचारण के लिए तलब किया। विचारण के दौरान अभियुक्त अशोक कुमार की मृत्यु हो जाने से उसके विरुद्ध कार्यवाही समाप्त हो गई।

साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने अभियुक्त मनोज और सुनील को दोषसिद्ध पाते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 387, 452, 323, 506 तथा 427 के अंतर्गत सजा सुनाई।

न्यायालय ने धारा 387 में पांच वर्ष के कारावास एवं ₹2,000 अर्थदंड, धारा 452 में चार वर्ष के कारावास एवं ₹1,500 अर्थदंड, धारा 323 में एक वर्ष के कारावास एवं ₹1,000 अर्थदंड, धारा 506 में दो वर्ष के कारावास एवं ₹500 अर्थदंड तथा धारा 427 में दो वर्ष के कारावास एवं ₹2,000 अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायालय ने आदेश दिया कि अर्थदंड के व्यतिक्रम को छोड़कर सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी तथा विचारण के दौरान जेल में बिताई गई अवधि का समायोजन धारा 428 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत किया जाएगा।

मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) महेन्द्र विक्रम सिंह ने प्रभावी पैरवी की, जिसके आधार पर न्यायालय ने अभियोजन के साक्ष्यों को विश्वसनीय मानते हुए दोनों अभियुक्तों को दोषी ठहराया।

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