0 नई रेल लाइन से होने बाली आमदनी का आकलन करने आये रेल अधिकारी
konch1 konch2कोंच-उरई। आने बाले रेल बजट में कोंच से भिंड रेल सेवा विस्तार को नई उड़ान भरने के लिये पंख मिल सकते हैं। चूंकि पूर्व में कराये गये इस रेल लाइन का सर्वे स्वीकृत हो चुका है और अब बात उससे आगे जानी है लिहाजा रेल विभाग अब इस बात की पड़ताल में जुट गया है कि व्यावसायिक दृष्टिकोण से यह लाइन विभाग को कितना फायदा पहुंचा पायेगी। इसके लिये विभाग ने एक अधिकारी को भेजा है जो इस पूरी लाइन पर पडने बाले संभावित स्टेशनों पर जाकर लोगों से मिल रहे हैं और उनसे जरूरी जानकारियां इकट्ठा कर रहे हैं।
कोंच और आसपास के इलाकों के बाशिंदों द्वारा कई बर्षों से लगातार इस बात की मांग उठाई जाती रही है कि एट-कोंच रेल लाइन को आगे बढाया जाना चाहिये ताकि इस पिछड़े इलाके के लोगों को रेल सुविधाओं का लाभ मिल सके। ऐसी अनगिनत मांगों की बिनाह पर रेल विभाग ने विगत वर्षों में तमाम सर्वे कराये जिनमें से एक सर्वे रेल विभाग ने स्वीकार कर इस लाइन को आगे भिंड तक विस्तार देने की योजना पर काम आगे बढाया है। उत्तर-मध्य रेलवे के यातायात निरीक्षक इलाहाबाद वीपी सिंह आज कोंच आकर यहां के संभ्रांत और व्यापारिक व्यक्तियों से मिले और अगर यह रेल लाइन कोंच से आगे बढ कर भिंड को जोड़ती है तो इससे विभाग को कितनी आमदनी हो सकती है, पर उनका नजरिया जानने की कोशिश की है। इतना ही नहीं, उक्त अधिकारी अपनी पड़ताल आगे भी ले जाने वाले हैं और इस नई प्रस्तावित रेल लाइन पर पडने बाले सभी स्टेशनों के गांवों या कस्बों के लोगों से मिल कर अपने तरीके से मिलने वाले विजनेस की हकीकत परखेंगे। उक्त अधिकारी ने एक सवाल के जबाब में कहा कि यद्यपि नई रेल बिछाने के लिये आमदनी की स्थिति कारक भले ही न मानी जाये लेकिन विभाग को सब तरफ की जानकारियां करनी पड़ती हैं। यहां पर यातायात निरीक्षक वीपी सिंह ने पालिका चेयरपर्सन प्रतिनिधि विज्ञान विशारद सीरौठिया तथा गल्ला व्यापारी समिति के अध्यक्ष अजय गोयल से भी मुलाकात की। इन लोगों ने अपनी राय उनके सामने रखते हुये कहा कि अगर यह रेल लाइन मूर्त रूप लेती है तो रेलवे को तो व्यापारिक दृष्टिकोण से फायदा होगा ही, इस पिछड़े इलाके की जनता को विकास की मुख्य धारा में आने का मौका मिलेगा और वे सीधे देश की राजधानी से जुड़ सकेंगे।
बताना समीचीन होगा कि कोंच कभी कपास उत्पादन का भी प्रमुख केन्द्र रहा है, यहां से कपास के मुंबई, कोलकाता या अन्य प्रांतों के लिये निर्यात को देखते हुये ब्रिटिश हुकूमत ने इस छोटे से कस्बे को रेल मार्ग से जोडने की जो पहल शताब्दी भर पूर्व की थी उसे अगर सही दिशा दी जाती तो कोंच आज बुंदेलखण्ड का मेनचेस्टर होता, किंतु स्वाधीनता के बाद मिले उपेक्षा के दंश ने कोंच के औद्योगिक नगर बनने के सपने को चकनाचूर करके रख दिया है। वर्ष 1902 में शुरू हुई यह रेल परियोजना दो साल में पूरी हो गई और 1904-05 में इस लाइन पर रेल यातायात शुरू हो गया। ब्रिटिश हुक्मरानों की सोच थी कि इस रेल लाइन को आगे दिबियापुर तक बढा कर इस क्षेत्र को सीधे दिल्ली से जोड़ा जाये ताकि कोंच से उद्योग व्यापार का सीधा रास्ता खुल सके। उन्होंने अपनी इस सोच को अमली जामा पहनाने की दिशा में शुरूआती होमवर्क भी किया था और आगे की लाइन का सर्वे आदि भी कराया गया लेकिन तब तक पहले विश्व युद्ध के बादल मंडराने लगे थे और ब्रिटिश शासन में शुरू हुई इस परियोजना को ठंडे बस्ते में जाना पड़ा। इसके बाद एक बार फिर इस रेल परियोजना पर काम चालू हुआ तभी दूसरा विश्व युद्ध आकार ले चुका था सो यह परियोजना परवान चढने से पहले ही खत्म भी हो गई।

कोंच से भिंड के बीच आठ नये रेल स्टेशन बनेंगे
0 चार हाल्ट और चार क्रॉसिंग स्टेशन हैं प्रस्तावित
konch3अगर इस कोंच-भिंड के बीच नई रेल परियोजना पर विभाग आगे बढता है तो उसे आठ नये स्टेशन बनाने होंगे। जैसा कि इस परियोजना के प्रस्तावित मानचित्र में दिखाया गया है जिसमें कोंच और भिंड तो पहले से ही स्थापित रेलवे स्टेशन हैं जबकि बमरा, नदीगांव, लहार, मिहौना, रौन, लहरोली, ऊमरी और चरथर नये स्टेशनों के रूप में विकसित होंगे। रेल विभाग के इस प्रस्तावित नक्शे में बमरा, नदीगांव, लहरोली तथा चरथर को हाल्ट स्टेशनों का दर्जा दिये जाने की योजना है जबकि लहार, मिहौना, रौन और ऊमरी को क्रॉसिंग स्टेशन बनाया जायेगा, यानी इन क्रॉसिंग स्टेशनों पर अप एण्ड डाउन वाली गाडियों की क्रॉसिंग कराई जा सकेगी। इसके अलावा दो बड़ी नदियों के काफी बड़े पुल, डेढ दर्जन बड़े और लगभग इतने ही छोटे पुल पुलियां रेल विभाग को बनाने होंगे।


प्रस्तावित रेल लाइन कोंच की लाइफ लाइन होगी-विनीता
konch4कोंच के विकास की बागडोर थामने वाली पालिका चेयरपर्सन विनीता सीरौठिया इस नई रेल परियोजना पर आगे बढता काम देख काफी उत्साहित हैं, उनका कहना है कि कोंच के बड़े व्यावसायिक केन्द्र होने के नाते अंग्रेजी शासन में आकार लेने बाली कोंच की रेल सेवा हमेशा उपेक्षा का दंश झेलती रही है लेकिन अब लगता है कि केन्द्र सरकार का ध्यान इस घोरतम पिछड़े इलाके की ओर गया है और कोंच-भिंड रेल लाइन का सर्वे स्वीकार करके यह संकेत दिये हैं कि इस पर काम आगे बढ सकता है। अगर यह रेल परियोजना आकार लेती है तो यह आगे चल कर कोंच की लाइफ लाइन साबित होगी। यहां के व्यापारियों का जुड़ाव सीधे मध्यप्रदेश और आगे देश की राजधानी से हो सकेगा, यानी रेल लाइन तरक्की की लाइन बन जायेगी।
पत्र भेजो अभियान चला रही एक संस्था
konch5सौ साल के इतिहास में कोंच-एट रेल लाइन आगे नही बढ सकने की त्रासदपूर्ण स्थिति को देखते हुये पिछले कुछ दिनों से उत्साही युवाओं की एक फौज इसको आगे बढवाने हेतु मानव शक्ति समाजसेवी संस्थान के बैनर तले पत्र भेजो अभियान चला रही है। संस्था के प्रबंधक अखिलेश व्यास, राघवेन्द्र रवा, सौरभ टीहर, देवेन्द्र कौशिक, विकल गोस्वामी आदि समाज के बुद्धिजीवियों से संपर्क कर उन्हें रेल विभाग को पत्र लिखने के लिये प्रेरित करने में जुटे हैं जिसके तहत अब तक तकरीबन ढाई हजार पत्र रेल विभाग के मुख्यालय को लिखे भी जा चुके हैं। इस संस्था ने कस्बे के स्कूलों, कॉलेजों के अध्यापकों, छात्र छात्राओं से संपर्क करने की मुहिम में विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, सेठ विन्द्रावन इंटर कॉलेज, अमरचंद्र माहेश्वरी इंटर कॉलेज आदि में सम्पर्क किया जहां उन्हें अभूतपूर्व सहयोग भी मिल रहा है।

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