उरई। भाकपा (माले) की जिला कमेटी की बैठक पार्टी के बुंदेलखंड प्रभारी काॅ. रमेश सिंह सेंगर की मौजूदगी में कोरी धर्मशाला उरई स्थित पार्टी कार्यालय में संपन्न हुई। बैठक में पार्टी के छात्र युवा संगठनों द्वारा 23 मार्च से 14 अप्रैल तक ‘लोकतंत्र बचाओं, देश बचाओ’ भगत सिंह-अंबेडकर संदेश यात्रा के आयोजन में पूरी क्षमता से सहयोग करने का निर्णय लिया गया।
बैठक को संबोधित करते हुए पार्टी के बुंदेलखंड प्रभारी काॅ. रमेश सिंह सेंगर ने कहा कि बुंदेलखंड में पहले ही अकाल जैसे हालात थे लेकिन जो भी कुछ दिखाई दे रहा था ओला वृष्टि ने उसे भी नष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड के किसानों के जीवन सुरक्षा के लिए केंद्र और प्रदेश सरकारों को प्रभावी कदम उठाने होंगे। उन्होंने मांग की कि इस संकट की घड़ी में किसानों को बचाने के लिए उनके सभी कर्जे माफ किये जाये तथा प्रति हैक्टेयर पचास हजार रुपया मुआवजा दिया जाये। काॅ. सेंगर ने किसानों के साथ मोदी सरकार की दगाबाजी की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि एक ओर केंद्र सरकार पूंजीपतियों के 1 लाख 14 हजार करोड़ रुपये माफ कर दे रही है वहीं किसानों की जीवन की रक्षा के लिए कर्ज माफी में टाल-मटोल कर रही है। जिसे बुंदेलखंड का किसान बर्दास्त नही करेगा। उन्होंने केंद्र सरकार की तानाशाही पूर्ण नीतियों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि मोदी सरकार असहमति के अधिकारों और कैंपसों के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया है। हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्र रोहित बेमुला की जान इस युद्ध की भेंट चढ़ गई तो कई और नौजवानों-छात्रों पर देशद्रोह के आरोप लगाकर उनके ऊपर कीचड़ उछाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने आजादी के आंदोलन में अंग्रेजों की मुखबरी और आंदोलन से गद्दारी की है वह आज देश भक्ति का प्रमाण पत्र बांट रहे हैं। उन्होंने कहा कि आरएसएस के पास एक भी ऐसा व्यक्ति नही जिसने आजादी की लड़ाई में लाठी और गोली खाई हो। उन्होंने कार्यकर्ताओं का आवाहन किया कि भगवा ब्रिगेड की असलियत को जनता के बीच ले जाने में जुटे।
बैठक में जालौन नगर की जनता द्वारा रेलवे लाइन को दिबियापुर और भिंड के लिए बिछाये जाने की मांग पर चलाए जा रहे आंदोलन का समर्थन किया गया। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि भगत सिंह की याद में 22 मार्च सायं 4 बजे ‘‘नये भारत के वास्ते-भगत सिंह-अंबेडकर के रास्ते’’ नारे के तहत मार्च निकाला जायेगा।
बैठक में जिला सचिव काॅ. राजीव कुशवाहा, काॅ. रामसिंह चैधरी, काॅ. कांशीराम वर्मा, काॅ. अशोक दोहरे, काॅ. हरी शंकर अहिरवार, शिववरन सिंह आदि ने भी विचार रखे।






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