कोंच-उरई। इसी माह हुई भीषण ओलावृष्टि और मूसलाधार बारिश की मार त्यौहारों पर भी ऐसी पड़ी है कि न तो त्यौहार मनाने वाले बाजार में दिख रहे हैं और न ही दुकानदारों की बिक्री हो रही है। ऊपर से खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों का भी बुरा असर बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है जिसके चलते बाजारों में गजब की सूनर पसरी है। होली के त्यौहार में बाजार की चहल पहल ही गायब है, दुकानदार अपनी दुकानों पर हाथ पर हाथ रखे बैठे हैं, आम लोग एक किलो की जगह अब पाव भर से काम चला रहे हैं।
कोंच तहसील क्षेत्र में पिछले साल के बाद अबकी दफा फिर भीषण ओलावृष्टि और बारिश ने किसानों की कमर ही तोड़ कर रख दी है, ऊपर से खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों का असर बाजार पर साफ दिखाई पड़ रहा है। हिन्दुओं के एक सबसे बड़े पर्व होली पर दुकानदार अपनी-अपनी दुकानों पर हाथों पर हाथ धरे बैठे हैं और ग्राहकों के इंतजार में टकटकी लगाये बैठे रहते हैं। कुछ वर्षों से मंहगाई से आम नागरिकों को राहत नहीं मिल पा रही है जिससे लोगों को अपनी ग्रहस्थी भी चलाना मुश्किल पड़ रहा है। ये होली का त्यौहार, जिसमें गरीब आदमी मैंदा, रवा, बेसन, शक्कर, तेल, धी, खोआ, सहित खाने पीने की वस्तुएं खरीदने मेें लोगों का पसीना छूट रहा है। एक माह के अंदर खाद्य वस्तुओं के दाम 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ जाने से आम आदमी किलो के जगह पाव भर सामान से काम चला रहा है। उधर रंग, गुलाल एवं पिचकारी बालों का भी बुरा हाल है। रंग, गुलाल, पिचकारी की मांग पिछले साल से आधी भी नहीं रह गई है। हाथ ठिलिया पर सजाये रंग, गुलाल की दुकान सतीश वर्मा का कहना कहना कि इस बार लोगों में वह उत्साह नहीं देखने को मिल रहा है जो अमूमन पर्वों पर देखने को मिलता रहा है।
किराना व्यापार समिति के अध्यक्ष संदीप अग्रवाल का कहना है कि एसे त्योहारों पर बाजार में पैर रखने की जगह नहीं रहती थी और इस बार तो पूरे बाजार में सन्नाटा पसरा है। गरीब लोगों का कैसे त्योहार मन रहा है इसे हम आसानी से समझ सकते हैं। मनोज सेठ का कहना है कि महंगाई के कारण लोग त्योहारों पर अब रस्म अदायगी भर करके किसी तरह त्यौहार मनाने की औवचारिकता निभा रहे हैं। बाजार में खोवे की कीमतें दो सौ से लेकर तीन सौ रूपये प्रति किग्रा तक हैं लेकिन मिलावट के दौर में उसके सही होने पर भी संदेह है। राकेश सोनी का कहना है कि एक माह के अंदर दालें, तेल,घी, शक्कर आदि वस्तुओं के रेट आसमान छू रहे हैं ऐसे में ग्रहस्थी का पूरा बजट बिगड़ रहा है, गरीब लोग बुरी तरह परेशन हैं। ऐसी मंहगाई में क्या होली और क्या दीवाली सब पर महंगाई की मार छाई है।






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