पुलिस मुकदमा दर्ज करने के बजाय निपटारे की फिराक में
उरई। फाग गा रहे दलित प्रधान को जातिगत जलन के कारण दबंगों ने घेर लिया। उनके द्वारा शुरू की गयी गाली गलौज का जब प्रधान ने विरोध किया तो वे लोग प्रधान के साथ-साथ उसके माता पिता पर भी टूट पड़े। इस तांडव की सूचना मिल जाने के बावजूद पुलिस मुकदमा दर्ज करने की बजाय मामला निपटाने में लगी हुई है।
जातिगत उत्पीडऩ और भेदभाव के समाप्त हो जाने की चर्चा करने वालों को माधौगढ़ थाने के कुरौंती गांव में होली के दिन हुई उक्त घटना पर गौर करना चाहिये। घटनाक्रम के अनुसार गांव के नवनिर्वाचित प्रधान हरीश कुमार अपने टोले में फाग करवा रहे थे। इसी दौरान उनके चुनाव से चिढ़े बैठे हर्षित, अजय प्रताप, अरुण प्रताप अंशु, राजीव कुमार और विशम्भर सिंह आदि दबंग नशा करके वहां पहुंच गये। उन्होंने पानी फेेंकते और गाली गलौज करते हुए फाग बंद करा दी। प्रधान हरीश कुमार ने जब उनकी इस कारगुजारी पर विरोध जताया तो वे लोग हमलावर हो गये और उन्होंने हरीश के वृद्ध माता पिता को जमकर पीटा।
घटना के दिन ही हरीश इसका मुकदमा लिखाने थाने गये लेकिन तहरीर ले लेने के बावजूद पुलिस ने मुकदमा नहीं लिखा। बताया जाता है कि पुलिस आरोपी पर से ले देकर दोनों पक्षों में समझौता कराकर मामले की लीपापोती करने की फिराक में हैं। दूसरी ओर स्वाभिमान पर हुई इस चोट को पीडि़त पक्ष भूल जाना गवारा नहीं कर रहा। अनुसूचित जाति, जनजाति उत्पीडऩ के विरुद्ध कठोर संवैधानिक संकल्प होने के बावजूद पुलिस को दलितों के आत्म सम्मान को संरक्षण देने की कोई फिक्र नजर नहीं आ रही।






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