डीएम ने प्रधानों से पूरे गांव के नजरिये से विकास कराने पर दिया बल
उरई। जिलाधिकारी रामगणेश ने नये प्रधानों से कहा है कि वे लोहिया आवास योजना के लाभार्थियों के मकान एक ही जगह बनवायें जिससे उस जगह को कालोनी का रूप देकर बिजली, पानी आदि बुनियादी सहूलियतें सुविधापूर्वक उपलब्ध करायी जा सकेें। जिलाधिकारी जानकी पैलेस में आयोजित प्रधानों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। इसमें 250 से अधिक प्रधान शामिल थे।
जिलाधिकारी ने बताया कि बुन्देलखण्ड के लिये नई समाजवादी पेंशन की मंजूरी के लिये 2 लाख का लक्ष्य भेजा गया है। प्रधानों को इसमें ईमानदारी से भूमिका निभानी चाहिये। पेंशन के लिये पात्र परिवारों को चयनित कर उनके आवेदन भिजवायें। उन्होंने बताया कि अधिक से अधिक गरीब समाजवादी पेंशन योजना से आच्छादित हो सकेें। इसके लिये आय की अधिकतम सीमा बढ़ा दी गयी है। ग्रामीण क्षेत्र में पहले 19886 रुपये की आय सीमा तक वालों को पेंशन मिल सकती थी लेकिन अब यह सीमा 46080 रुपये कर दी गयी है। इसी तरह शहरी क्षेत्र में आय सीमा 25046 रुपये से बढ़ाकर 56860 रुपये कर दी गयी है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने वृद्धावस्था पेंशन 300 रुपये से बढ़ाकर 400 रुपये महीने कर दी है। उन्होंने कहा कि नये वित्तीय वर्ष से शादी बीमारी अनुदान फिर शुरू कर दिया जायेगा। इस अनुदान की धनराशि भी 10 हजार से बढ़ाकर 20 हजार रुपये कर दी गयी है। खाद्यान्न सुरक्षा के लिये उन्होंने कहा कि प्रधान पात्र परिवारों से आवेदन करायें। कोटेदारों का वर्चस्व इस योजना में समाप्त होना चाहिये। उन्होंने पात्र गृहस्थियों के मामले में अधिकारियों की टीम बनाकर मौके पर सत्यापन कराया। जिसमें बड़ी संख्या में अपात्रों को हटाकर कोटेदारों का धंधा बंद किया गया है।
उन्होंने कहा कि अहेतुक सहायता अन्त्योदय कार्ड धारकों को दी जा रही है। बुन्देलखण्ड में मुख्यमंत्री द्वारा स्वयं सहायता वितरण के लिये आने की संभावना है। इसे देखते हुए अधिकारी पूरी तैयारी रखें। ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के आंसू पोंछने के लिये उन्होंने अधिकारियों से निष्ठापूर्वक काम करने को कहा। डीएम ने प्रधानों से कहा कि वे पूरी निष्पक्षता से गांव का विकास कराने के लिये दायित्व निर्वाह करें। इसमें किन लोगों ने उन्हें वोट दिया है और किन्हें नहीं। इस नजरिये को अपनाने की जरूरत नहीं है। चुनाव के बाद वे पूरे गांव के संरक्षक हो चुके हैं और यह भावना उनके अमल में दिखनी चाहिये। उन्होंने कहा कि मजरों के विकास पर विशेष ध्यान दें क्योंकि विकास की प्रक्रिया में इनकी उपेक्षा किये जाने का ढर्रा अभी तक अपनाया गया है जिसे बदला जाना चाहिये।
मुख्य विकास अधिकारी एसपी सिंह, डीआरडीए के परियोजना निदेशक चित्रसेन सिंह, उपायुक्त मनरेगा पीसी चंद्रोल, जिला पंचायत राज अधिकारी सरफराज खान, जल निगम के अधिशाषी अभियन्ता सुखलाल आदि ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

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