उरई। बाबा साहब डाॅ. अंबेडकर ने महिलाओं के अधिकार और सम्मान के लिए मंत्री पद की कुर्बानी देने में संकोच नही किया था। दलित आंदोलन की परंपरा समानता पर आधारित है जिसमें महिलाओं के शोषण और भेदभाव की कोई गंुजाइश नही है। वर्तमान पीढ़ी को इस आंदोलन को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ाना होगा।
चुर्खी रोड स्थित बौद्ध बिहार में बाबा साहब की 125 वीं जयंती के उपलक्ष्य में चल रहे कार्यक्रमों की श्रंखला में आज दलित महिलाओं की दशा व दिशा विषय पर हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने यह विचार प्रकट किये। महिला थानाध्यक्ष नीलेश कुमारी ने कहा कि महिलाओं को अपने साथ होने वाले भेदभाव और अत्याचारों को निर्मूल बनाने के लिए खुद आगेे आना होगा। आॅल इंडिया दलित महिला अधिकार मंच की नेत्री रजनी ने कहा कि बाबा साहब किसी समाज की तरक्की उसमें महिलाओं की स्थिति से आंकते थे। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में दलित महिलाएं अभी भी परंपरागत उत्पीड़न के शिकंजे से मुक्त नही हो पाईं हैं। इस इलाके में कई गांवों में आज भी बाल्मीकि समाज की महिलाएं सिर पर मैला ढोने को मजबूर हैं। दलित महिलाओं के पास शौचालय नही हैं जो यौन उत्पीड़न की वजह साबित हो रहा है।
बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच के संयोजक कुलदीप कुमार बौद्ध ने बताया कि बुधवार को बुंदेलखंड में दलित उत्पीड़न व एससी, एसटी एक्ट का नया अध्यादेश विषय पर संगोष्ठी होगी।







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