उरई। डीएम साहिबा जिला अस्पताल में कुपोषण पुनर्वास केंद्र का तय समय पर उदघाटन करने पहुंच गई तो उन्हें बड़ी अजीबो-गरीब स्थिति का सामना करना पड़ा। यहां तक कि अस्पताल प्रशासन जिले भर में चिन्हित नौ हजार बच्चों में से एक को भी इस अवसर के लिए इकटठा नही कर पाया। बाद में ठीक-ठाक बच्चे इधर-उधर से बटोर कर उदघाटन समारोह के प्रदर्शन में लाये गये।
जिलाधिकारी संदीप कौर, मुख्य विकास अधिकारी एसपी सिंह के साथ ठीक 10 बजे जिला अस्पताल पहुंच गईं। कुपोषण पुनर्वास केंद्र के उदघाटन का तय समय यही था। लेकिन अस्पताल के अधिकारी मैडम को पहुंचने में कम से कम एक घंटे की देर लग जाने के अपने अनुमान के प्रति इतने आश्वस्त थे कि उन्होंने 10 बजे तक कोई तैयारी ही नही की थी। उधर जिलाधिकारी साहिबा जैसे ही उतरी हड़कंप मच गया। सीएमएस डाॅ. वीवी आर्या और सीएमओ डाॅ. अजीत जायसवाल हांफते-हांफते जब तक 10 शैय्या के पुनर्वास केंद्र पर पहुंचे तब तक डीएम साहिबा उसके भीतर दाखिल हो चुकी थीं। अब खिसियाने सीएमएस करें तो क्या करें। उन्होंने डीएम साहिबा से विनती की कि आप केंद्र से बाहर निकल आयें तांकि फीता लगाया जा सके। जिसके काटकर भीतर जाने पर उदघाटन का विधि-विधान पूरा होगा। खैर शराफत की धनी जिलाधिकारी बाहर निकल आईं। तब तक फीता आया लेकिन अब उसे दरवाजे के दोनों छोरों पर बांधा कैसे जाये। इसका कोई इंतजाम नही था। परेशान सीएमएस ने कर्मचारियों को एक-एक छोर पर फीता पकड़ने को कहा और इसके बाद कैंची देकर डीएम साहिबा से बोले अब आप ऐसे में ही इसे काट दें।
महिला अस्पताल की सीएमएस डाॅ. सुनीत बनौधा तो उदघाटन हो जाने के बाद पहुंच पाईं। उधर अस्पताल में कुपोषित बच्चे भी उस समय तक नही आ पाये थे। इसलिए परिचितों के बच्चे लाकर खाना पूर्ति की गई। उल्लेखनीय है कि अति कुपोषित बच्चों के साथ-साथ उनकी मां को भी उक्त वार्ड में एक हफ्ते के ट्रीटमेंट के लिए रखकर सरकार की ओर से निःशुल्क पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।








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