सिपाही का कुत्ता इतना खूंखार तो बड़े साहब का कितना होगा खूंखार

सिपाही द्वारा कुत्ते से कटवाये गये पीड़ित ने डर के मारे डाक से भेजी एसपी को शिकायत
उरई। जुआ खेले जाने की शिकायत करने गये समाजसेवी पर सिपाही ने कुत्ता दौड़ा दिया। जिसने उसे काटकर बेहाल कर डाला। समाजसेवी ने इसे लेकर एसपी से आईजी जोन तक को शिकायती पत्र भेजे हैं।
पुलिस के अधिकारी आये दिन लोगों को असामाजिक कार्यों में लगे लोगों की कारगुजारियां बेहिचक पुलिस को देने के गाल बजाया करते हैं। पुलिस अधिकारी उनका नाम गोपनीय रखने और गलत तत्वों के खिलाफ कार्रवाई में कोई चूक न करने का भरोसा दिलाते हैं। यह दूसरी बात है कि उनके इस प्रवचन पर यकीन करने वालों की अक्सर ऐसी दुर्गति होती है कि वह आने वाली पीढ़ियों तक के लिए खाकी का कभी न विश्वास करने की विरासत छोड़कर जाता है और अपनी जिदंगी में तो फिर कभी पुलिस को किसी गलत काम की जानकारी देने की कभी सोचता तक नही है।
इंदिरा नगर निवासी धर्मपाल मिश्रा भी ऐसे ही भुक्त भोगियों में शुमार हो गये हैं। उन्होंने समाज सेवा करके नगर पालिका के वार्ड मैंबर का चुनाव जीतने का सपना संजो रखा हैं। इसके कारण मोहल्ले के लोग उनसे हर तरह की समस्या बताने आते हैं। जुआरियों से परेशान मोहल्ले वालों ने इसी बिनाह पर उनसे एक दिन अपना दुखड़ा रोया तो वे जुआ के खिलाफ जोश में आ गये और अपनी चैकी में जुआरियों के खिलाफ शिकायत करने पहुंच गये। मंडी चैकी में उन्हें दरोगा साहब तो नही मिले लेकिन सिपाही साहब मिल गये जिनका नाम प्रदीप यादव था। बताते हैं कि प्रदीप यादव चरित्र के बहुत ही अच्छे सिपाही हैं। इसलिए जिसका पैसा लेते हैं उसे सुरक्षित रखने के लिए वे कोई कसर नही छोड़ते। उनका कहना है कि नौकरी से बड़ी चीज चरित्र है इसलिए जिससे पैसा लो उसके प्रति पूरी वफादारी दिखाओ। वाह रे! प्रदीप यादव।
किस्सा कोताह यह है कि प्रदीप यादव साहब की जुआ खेलने वाले और खिलाने वालों से सेटिंग है। इसलिए उनके खिलाफ समाजसेवा उन्हें बहुत नागवार गुजरी। उनके अंदर नमक हलाली की जज्बे ने ऐसा जोर मारा कि उन्होंने सोच लिया कि अपने खैरख्वाहों की बुराई सुनने की बजाय इस समाज सेवी के बच्चे को ऐसा सबक सिखाये जिससे भविष्य में कोई इस तरह की शिकायत लेकर फिर चैकी में आने की जुर्रत न करे। इसके बाद प्रदीप यादव ने जो किया उसकी कल्पना तक नही की जा सकती। उन्होंने धर्मपाल मिश्रा को पहले उनकी डिक्शनरी में जितनी गालियां थी सारी सुना डाली। अपमानित धर्मपाल ने चुपचाप बेहूदा गालियों को सुनने की विनम्रता दिखाने की बजाय जब उनका प्रतिवाद करने की जुर्रत की तो पहले उन्होंने लातों और घूसों से उन्हें मारकर पुलिस की छवि को बचाया और बढ़ाया लेकिन उन्हें केवल इतने से ही संतोष नही हुआ। उन्होंने अपने कुत्ते को उकसाकर उनके ऊपर चढ़ा दिया। कुत्ते ने कई जगह काटा जिससे हा-हा करते हुए धर्मपाल वहां से किसी तरह निकल पाये। इस अनुभव के बाद धर्मपाल की हालत इस कदर खराब है कि वे सीधे पुलिस अधीक्षक से मिलने की भी हिम्मत नही जुटा पा रहे। कहते हैं एसपी बड़े साहब हैं उनके पास तो और बड़ा कुत्ता होगा। इसलिए उन्होंने डाक से एसपी साहब को शिकायत भेजी है।

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