पूरे पुलिस महकमे में खलबली
उरई। अदालत ने आज एक महिला की जलकर मौत के मामले में बेगुनाह को फंसाने की साजिश में शामिल करार देते हुए उरई के पूर्व कोतवाल, एक सिपाही, महिला के पति और भाई के विरुद्ध आपराधिक षड़यंत्र का मुकदमा कायम करा दिया है।
मोहल्ला बघौरा निवासी सेवेंद्र सिंह की पत्नी मिथला देवी गत् वर्ष 11 फरवरी को घर से गायब हो गई थी। जिसकी रिपोर्ट गुमशुदगी में सेवेंद्र ने उरई कोतवाली में दर्ज कराई थी। 23 फरवरी 2015 को मिथला का शव फैक्ट्री एरिया में मिला। जिसे लेकर सेवेंद्र ने पुलिस को बताया कि उसके मकान में किराये से रहने वाले बरौर जिला कानपुर देहात निवासी पप्पू संखवार मिथला से अवैध संबंध हो गये थे। जिससे उसने पप्पू से अपना मकान खाली करा लिया था। इसी का प्रतिशोध लेेने के लिए पप्पू ने मिथला का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी। तत्कालीन कोतवाल दयाशंकर सिंह ने इस मामले में पप्पू के खिलाफ चारशीट दाखिल की थी।
अपर जिला जज पंचम विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने पुलिस के साक्ष्यों का गहन परीक्षण किया। उन्होंने पाया कि महिला के पति, भाई और पुलिस ने मिलकर पप्पू को उसकी हत्या के मामले में फसाकर आजीवन कारावास की सजा कराने के लिए झूठे सबूत तैयार किये और अदालत को गुमराह करने का प्रयास किया। अपर जिला जज ने पप्पू को मामले से बरी करते हुए उक्त जुर्म के लिए तत्कालीन कोतवाल दयाशंकर सिंह, कांस्टेबिल सुएब आलम, पति सेवेंद्र सिंह और भाई जितेंद्र के खिलाफ सीजेएम अदालत में 194 सीआरपीसी के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए आपराधिक षड़यंत्र का मुकदमा दर्ज करा दिया। अपर जिला जज के इस आदेश से अभियोजन में मनमानी के आदी पुलिस अफसरों में खलबली मची हुई है। पूरा विभाग सकते की हालत में है।







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