उरई। ख्वाजा गरीब नवाज ने इस्लाम की व्यवहारिक परिभाषा करके न सिर्फ सदमार्ग प्रशस्त किया बल्कि इस्लाम के नाजुक अहसासात आम करके हिंदुस्तान को हिंदुस्तान बनाया। उक्त विचार मौलाना सलमान कादरी ने सरकार पदम् शाह की दरगाह पर जश्ने गरीब नवाज की वज्म में व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मदीने शरीफ से नवी पाक के हुक्म पर हम स्याहकारों की तकदीर संवारने हिन्दवली भारत आये। जो नफरत का राग अलापते है वो इबलीस और यजीद के पैरोकार हैं, इस्लाम में नफरत के लिए कोई जगह नही है। मोहब्बत इंसानों के लिए दर्द, खिदमत और रव की राह मे फना की हद तक तत्पर रहने का जो जज्बा हमें दिया है वही इस्लाम का मूल सार है। हाफिज यूसुफ बरकाती ने अपनी तकरीर कहा कि मजहब का सीधा उसूल है कि किसी को नाहक न सताओं। यही नवी करीम का पैगाम है और यही सुफिया इकराम का रास्ता है। मगर कुछ जड़ बुद्धि तत्व गलत व्याख्या करके अपने स्वार्थ के लिए गुमरही फैलाने पर आमादा है। ये आतंकी जमात इस्लाम से खारिज हैं। अस्ल इस्लाम तो वह है जो ख्वाजा गरीब नवाज, निजामुददीन औलिया, बुल्लेशाह, बारिश पाक और इन जैसे हजारों औलिया इकराम ने हमे दिखाया। इसे पहले सुबह 8 बजे बाबा अस्ताने हाफिज मकसूद साहब ने कुरानख्वानी में भाग लिया और जश्ने गरीब नवाज की बज्म में हाफिज जुनैद बरकाती व हाफिज आसू बरकाती ने नात पाक पढ़ी। तेरा नाम ख्वाजा मुईनुददीन तू रसूले पाक की आल है, तेरी शान है ख्वाजा ऐ ख्वाजा जगा, तुझे बेकशी का ख्याल है, मेरा बिगड़ा वक्त संभाल दो, मेरे ख्वाजा मुझको नवाज दो, तेरी एक निगाह की बात है मेरी जिंदगी का सवाल है, प्रोग्राम में आये अकीदतमंदों का उर्स कमेटी के अध्यक्ष आरिफ कादरी व कार्यक्रम संयोजक कृपाशंकर द्विवेदी उर्फ बच्चू महाराज ने इस्तकबाल किया। इस मौके पर संरक्षक मुमताज रहमानी, रिजवान मास्टर, पूर्व अध्यक्ष छोटू बैटरी, सुशील द्विवेदी, संजू दुबे, मुन्ना अंसारी, भूरेशाह, इबादत अली, जुबैर आलम, ऐजाज पेंटर, शाहदत अली, मुन्ना कैसेट आदि अनेक लोग मौजूद रहे।







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