उरई(जालौन)। इप्टा उरई विगत दस वर्षो से रंगमंचीय प्रशिक्षण स्कूलों कालेजों में निःशुल्क करता आ रहा है इसी क्रम में गांधी कालेज पंतहाल में रंगमंचीय प्रशिक्षण चलाया जा रहा है। यह विचार धर्मेन्द्र कुमार ने कार्यशाला में बच्चों के बीच प्रस्तुत किए।
रंगमंचीय व्यक्ति में आत्म निर्भरता निर्मय होकर विचार प्रस्तुत करना भावों के द्वारा आपनी बात कहना, शारीरिक गतिविधियों, आवाज का स्पष्टीकरण आदि कार्य हम रंगमंच पर व्यक्त करते है। शारीरिक मजबूरी के लिए कई प्रकार की एक्सर साइज बच्चों के द्वारा करवाई जाती है। कला रंगों की पहचान गीत, संगीत प्रकृति के विषय में बच्चों को जानकारी दी जाती है। यह विचार धनीराम इप्टा रंगकर्मी ने व्यक्त किए। प्रशिक्षण दे रहे प्रशिक्षक रंगकर्मी राज पप्पन द्वारा एक नाटक प्रकृति औरत और 1090 तैयार किया जा रहा है। वर्तमान समय में मनुष्य प्रकृति के प्रति असंवेदनाशील है कही पेड़ों की कटाई तो कहीं बालू खनन आदि से पानी की कमी का सामना मनुष्य पशु पक्षी कीट पंतगे करते नजर आ रहे है‘ धरती में पानी नही कोख में बेटी नही ऐसे मेें हम किस विकास की राह देखें। भारतीय समाज आज भी औरतों की सुरक्षा सम्मान के प्रति असंवेदनाशील है क्रूरता से पेश आता है। 1090 वुमेन पावर हेल्पलाइन द्वारा महिलाए अपनी सुरक्षा की मांग पुलिस से कर सकती है। गहन प्रचार प्रसार की जरूरत है ग्रामीण क्षेत्रों में 1090 हेल्पलाइन नम्बर महिलाए बेटियां जानती ही नही है। नाटक इसी प्रकार के समस्याओं को लेकर तैयार किया जा रहा है। प्रशिक्षणार्थी वरूण विनय, किशन, पवन, रमन, निखिल, अभय कुमार, ब्रजेश, कोमल, स्वेता, शिखा,दीपाली, राधा, सुमन, श्वेता, शीलू, रेखा, परवीन, आदि भाग ले रहे है।







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