उरई (जालौन)। माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बैथनी क्रिश्चियन होम मिशन/बी.सी.एच. मिशन की प्रबंधिका किरन के. मसीह तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध थाना कोतवाली उरई में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 0520/2026 (धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) बीएनएस) के मामले में गिरफ्तारी तथा आगे की कार्यवाही पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।
यह आदेश क्रिमिनल मिसलेनियस रिट पिटीशन संख्या 22277/2026 में दिनांक 07 अक्टूबर 2026 को न्यायमूर्ति अजय भनोट एवं न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने पारित किया। याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट श्री स्वेताश्व अग्रवाल तथा एडवोकेट संकल्प नारायण ने दलील दी कि विवाद लीज डीड की व्याख्या से जुड़ा है। संबंधित संपत्ति पर सोसाइटी और राज्य के बीच मुकदमा चल रहा है। सोसाइटी विवादित भूमि पर अल्पसंख्यक संस्थान चला रही है तथा FIR दुर्भावनापूर्ण तरीके से संस्थान को परेशान करने के उद्देश्य से दर्ज कराई गई है।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले (सलीब @ शालू @ सलीम बनाम उत्तर प्रदेश राज्य) का हवाला देते हुए कहा कि जब FIR या आपराधिक कार्यवाही को तुच्छ, परेशान करने वाली या बदले की भावना से प्रेरित बताया जाए, तो अदालत को FIR के अलावा पूरे मामले की परिस्थितियों को भी ध्यान से देखना चाहिए।
खंडपीठ ने मामले पर विचार की आवश्यकता बताते हुए उत्तरदाताओं को चार सप्ताह के अंदर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया तथा उसके बाद मामले को उपयुक्त खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का आदेश दिया। साथ ही स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी तथा दिनांक 03.09.2026 की FIR के अनुसरण में आगे की सभी कार्यवाहियां अगले आदेश तक स्थगित रहेंगी।
इस आदेश के अनुपालन हेतु प्रबंधिका किरन के. मसीह ने दिनांक 10 अक्टूबर 2026 को पुलिस अधीक्षक जालौन को प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया है, जिसमें समुचित आदेश पारित करने का अनुरोध किया गया है। प्रार्थना पत्र की प्रति जिलाधिकारी जालौन, प्रभारी निरीक्षक थाना कोतवाली उरई तथा अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद उरई को भी भेजी गई है।






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