09orai05 09orai03 09orai04उरई। भारतीय जनता पार्टी के सांसद भानुप्रताप वर्मा द्वारा गोद लिए गये हरदोई गूजर गांव में स्वच्छ भारत अभियान सिसकियां भर रहा है। डकोर ब्लाॅक का यह पूरा गांव गंदगी का अंबार नजर आ रहा है। ऐतिहासिक महत्व के इस गांव में सांसद की नजरें इनायत होने के बावजूद भी बदहाली दूर करने के नाम पर कुछ भी नही बदल सका है। विकास के नक्शे पर चमकदार जगह बनाना तो दूर साधारण सुविधाओं तक का विकास गांव के धरातल पर नदारत है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दबाव के कारण उनकी पार्टी के सांसदों द्वारा अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्र में एक गांव गोद लेने का औपचारिक ऐलान करना तो उनकी मजबूरी थी लेकिन कार्य संस्कृति के अभाव में ये सांसद जग से न्यारा अपना गांव बनाने की बजाय गोद लिए गांव में समय-समय पर भ्रमण करते रहने की फुर्सत भी नही निकाल पाये। हरदोई गूजर में प्रथम स्वाधीनता संग्राम के क्रांतिकारियों को पेड़ से लटकाकर सामूहिक फांसी दी गई थी। राष्ट्रवाद की दुहाई देने वाली पार्टी के सांसद के लिए इस नाते हरदोई गूजर के लिए वैसे भी एक अलग जज्बा होना चाहिए था लेकिन उन्होंने इसे अनचाही औलाद की तरह गोद लेने की वजह से यहां के लिए कोई फर्ज नही निभाया।
गांव वालों ने बताया कि लोड अधिक होने के कारण गांव में बिजली बराबर ट्रिप होती रहती है। सांसद जी से ट्रांसफार्मर की क्षमता उच्चीकृत कराने का आग्रह किया गया था। लेकिन उन्होंने इसके लिए कोई गंभीर प्रयास नही किया। सांसद जी से जब इस बारे मे पूंछा गया तो उन्होंने यह बताकर कि अधिकारी सपा के हैं जो उनकी नही सुन रहे अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। एक ग्रामीण ने बताया कि भाजपा में आस्था के नाम पर इतना तूफान मचलता है। लेकिन उनके गांव का प्राचीन मंदिर आसपास कूड़े से पटा हुआ है और सांसद जी को यहां तक की सफाई कराने की फुर्सत नही मिली। गांव में चार तालाब हैं लेकिन सभी सूखे हैं। जिससे बेजुबान मवेशी प्यासे तड़पकर मरने को मजबूर हो रहे हैं। अधिकारी समझते है कि इस गांव का कोई धनीधोरी नही है। इसलिए चारों तालाब भरे होने की फर्जी रिपोर्ट ब्लाॅक से जिला प्रशासन को भिजवा दी गई और सांसद जी ने उफ तक नही की। गांव में 80 हैंडपंप लगे हैं लेकिन जल स्तर खिसकने से लगभग दो दर्जन हैंडपंप प्रभावित हो चुके हैं जिसके कारण गांव में पानी को लेकर मारामारी मची हुई है।
भानुप्रताप वर्मा ने गांव में एक सीसी सड़क और नाला निर्माण की कृपा बरसाई थी लेकिन यह दोनों ही काम अधूरे पड़े हैं और बंद कर दिये गये हैं। भले ही सांसद ने इनको बंद न कराया हो लेकिन जिन कारणों से इन कामों को रोका गया है उन्हें खत्म करने के लिए अगर वे ढंग से पैरवी करते तो कभी के काम पूरे हो जाते।

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