रामपुरा। आम जनता की सेहत का ख्याल रखने के लिये कस्बा रामपुरा के सरकारी अस्पताल का आलम ही निराला है। जहां अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों को चिकित्सक सरकारी नहीं बल्कि प्राइवेट दवायें लिखकर उनका आर्थिक शोषण कर खुद मेडिकल स्टोरों से मोटा कमीशन लेकर अपनी सेहत बनाते देखे जा रहे हैं। यदि कोई मरीज अपनी लाचारी बताकर सरकारी दवायें देने की गुहार लगाता है तो उसे दवायें न होने का बहाना बनाकर गुमराह करने से नहीं चूकते हैं।
कस्बा रामपुरा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से लगभग आधा सैकड़ा के लगभग मरीज उपचार कराने इस मंशा के साथ पहुंचते हैं कि उनको अपनी बीमारी से संबंधित सरकारी दवायें मिल जायेगी और उनका स्वास्थ्य ठीक हो जायेगा। लेकिन जब चिकित्सक के पास मरीज उपचार कराने पहुंचते हैं तो डाक्टर उन्हें प्राइवेट दवाओं का लिखा पर्चा थमाकर खरीदने का हुक्म सुना देते हैं बेचारा मरीज जब दवायें खरीदने मेडिकल स्टोर पर पहुंचता है तो वह दवाओं के रेट सुनते ही पसीना पोंछने लगता है। ग्रामीण गंगाराम, विमल, रामभरोसे, वीरेंद्र, हरीशंकर, प्रदीप, नरेंद्र कुमार का कहना था कि सरकारी चिकित्सको ंकी धनकमाऊ नीति के चलते मरीज उन्हें दिखाने से भी संकोच करने लगे हंै और प्राइवेट चिकित्सक से उपचार कराते देखे जा रहे हैं। सरकारी चिकित्सकों के इस तरह के क्रियाकलापों से जहां प्रदेश सरकार की छवि धूमिल हो रही है तो वहीं सूखे की मार झेल रहे मरीज कर्जा लेकर अपना उपचार कराते देखे जा रहे हैं।





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