22orai01उरई। जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के चतुष्कोणीय मुकाबले में प्रत्याशियों ने अब द्वितीय और तृतीय वरीयता के मत बटोरकर लक्ष्य सिद्धि करने की रणनीति पर अमल शुरू कर दिया है।
बहुकोणीय मुकाबले की वजह से किसी एक प्रत्याशी द्वारा 13 मत जुटाने की गुंजाइश खत्म हो गई है जबकि जिला पंचायत सदन में बहुमत के लिए अध्यक्ष का निर्वाचन तभी संभव है जब उसे 13 मत हासिल हों। जिला पंचायत चुनाव की नियमावली में प्रावधान है कि बहुकोणीय मुकाबले में बहुमत के आंकलन के लिए वरीयता आधारित मतदान की व्यवस्था होगी। अगर किसी को प्रथम वरीयता में बहुमत नही मिलता तो द्वितीय वरीयता के वोट गिने जायेगें। चतुष्कोणीय मुकाबले में चार वरीयतायें रहेंगीं और निष्कर्ष निकालने के लिए जरूरत पड़ी तो चतुर्थ वरीयता के मतों की गिनती की जा सकती है।
ऐसे में प्रत्याशी प्रथम वरीयता में पूर्ण समर्थन न मिलने पर द्वितीय वरीयता के लिए सदस्यों से मनुहार कर रहे हैं। एक मजबूत निर्दल प्रत्याशी ने भाजपा में जो संेध लगाई है उसमें यह फार्मूला तय किये जाने के मददेनजर सपा खेमा चितिंत है। संभव है कि भाजपा के प्रत्याशी को प्रथम वरीयता में चारों सदस्यों का मत मिल जाये लेकिन द्वितीय वरीयता में भाजपा के सदस्य निर्दल प्रत्याशी को टिक कर दें। इसके बाद सपा प्रत्याशी ने भी संध्या मौखरी खेमे के साथ इसी फार्मूले पर सहमति बनाने की कोशिश की है। सपा जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह यादव और पार्टी हाईकमान के चुनावी पर्यवेक्षक दीपनारायण यादव ने इस सिलसिले में सुदामा दीक्षित के साथ गोपनीय तौर पर लंबी गुफ्तगू की। जिसका नतीजा तो सामने नही आया है लेकिन आसना खातून के पति राशिद और जेठ अनीस में कलेक्ट्रेट में चहलकदमी के समय लोगों से वार्ता करते हुए जिस तरह का आत्मविश्वास देखा गया उससे लगता है कि सपा प्रत्याशी के खेमे को कहीं न कहीं से कोई ठोस आश्वासन जरूर मिल गया है।
उधर बसपा के सारे सदस्य पार्टी का कोई उम्मीदवार न होने से फ्री हैं जिनमें आज घनश्याम अनुरागी और अनीस ने काफी हद तक कामयाब सेंधमारी कर दिखाई है। देर रात में निर्दलीय सदस्यों पर डोरे डालने का तेज अभियान नजर आयेगा। देखना है कि इसमें कौन से दिग्गज क्या भूमिका निभाते हैं।

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